कॉन्टैैक्ट ट्रेसिंग सेल, रैपिड रिस्पॉन्स टीम के आंकड़ों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां
बरेली। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा शासन को भेजी जा रही निगरानी रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर आंकड़ों में खेल किया जा रहा है। कोरोना थमने के बाद अपनी व्यवस्थाओं को बेहतर दिखाने के लिए खूब फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। 15 दिनों की रिपोर्ट पर गौर करें तो जिले में 64 संक्रमित मिले हैं, इनके संपर्क में आने वाले 17 हजार से ज्यादा लोगों को तलाशा जा चुका है। उधर, आरआरटी (रैपिड रिस्पॉन्स टीम) की 35 टीमों ने जिले के एक लाख से ज्यादा घरों का सर्वे भी कर लिया है। इन्हीं आंकड़ों के सहारे कोरोना से जंग लड़ी जा रही रही है।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में अब तक 40 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। सैकड़ों लोगों की मौत हुई है, लेकिन विभाग के आंकड़ों में सिर्फ 180 मौतें ही दर्ज हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए अमर उजाला ने प्रमुखता से खबरें प्रकाशित कीं तो स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को नोटिस जारी किए और संक्रमितों की मौत को पोर्टल पर अपलोड करने के सख्त निर्देश किए। अब जिले में प्रतिदिन चार से आठ ही संक्रमित मिल रहे है, मगर ट्रेसिंग रिपोर्ट पर गौर करें तो 15 दिन में 64 संक्रमित के संपर्क में आए 17 हजार लोग ट्रेस हुए हैं।
उधर, आरआरटी की 35 टीमों ने भी इन्हीं 15 दिनों में करीब एक लाख घरों का सर्वे कर पांच लाख लोगों का आंकड़ा तैयार कर दिया है। बताते हैं कि आरआरटी में आशा, एएनएम, शहर और ग्राम निगरानी समितियां शामिल होती हैं। संक्रमण थमने के बाद ज्यादातर आशा, एएनएम टीकाकरण में सक्रिय हैं। सवाल है कि फिर कौन घर-घर पहुंचकर सर्वे करके आंकड़ा दर्ज करा रहा है।
हकीकत में 30 से 35 लोग ही हो रहे ट्रेस
प्रकरण को गोपनीय रखते हुए सर्विलांस सेल के प्रभारी डॉ. अनुराग गौतम से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वह प्रति संक्रमित के संपर्क में आने वाले अधिकतम 25-30 और कभी कभार 35-40 लोगों को ही ट्रेस कर पाते हैं। बताया कि पिछले 15 दिनों में 64 संक्रमित मिले, इनके संपर्क में आने वाले करीब ढाई हजार लोग ही ट्रेस हुए हैं। इनमें जिनके लक्षण हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। इसके बाद निगरानी रिपोर्ट की जानकारी देते हुए दर्ज आंकड़ों पर सवाल किया गया तो उन्होंने रिपोर्ट की जानकारी से इनकार कर दिया। कहा, यह रिपोर्ट वह नहीं बनाते हैं।
संक्रमण थमने पर सक्रिय नहीं है आरआरटी
गोपनीयता बरकरार रखते हुए आरआरटी के नोडल अफसर रहे डॉ. केसी जोशी से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि करीब माह भर पहले जब संक्रमण की रफ्तार थम रही थी, तभी आरआरटी व्यवस्था खत्म हो गई थी। सभी को वापस उनके स्वास्थ्य केंद्र पर भेज दिया गया था। एमओआईसी को ही नोडल बनाकर क्षेत्र का सर्वे कराने का अधिकार सौंपा गया। कहा, अब टीकाकरण हो रहा है, ऐसे में सभी व्यस्त हैं। सर्वे नहीं हो रहा होगा। कहा, जब हजार संक्रमित प्रतिदिन मिल रहे थे, तब करीब तीन सौ टीमें सक्रिय थीं और उस वक्त प्रतिदिन चार हजार घरों का सर्वे हो पा रहा था।
रिपोर्ट में क्या आंकड़े दर्ज हैं, मुझे नहीं पता
अर्बन नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि अब संक्रमण थम चुका है। शहर में 15 स्वास्थ्य केंद्रों से ट्रैकिंग हो रही है। हर दिन प्रति केंद्र से करीब 25 से 30 घर ही ट्रैस हो रहे हैं। वहीं, देहात में भी सक्रिय 18 स्वास्थ्य केंद्रों से भी करीब इसी आधार पर ही ट्रेसिंग हो रही होगी। जो हर दिन करीब एक हजार के आसपास ही है। आंकड़ों की जानकारी देकर जब पूछा गया तो उन्होंने इस पर हैरत जताई और जानकारी से इनकार कर दिया। कहा, रिपोर्ट में क्या दर्ज हो रहा है, यह मुझे नहीं पता है। रिपोर्ट देखने के बाद ही कुछ कहा जा सक ता है।
- 15 दिन के आंकड़े
- 64 संक्रमित
- 17535 लोग संक्रमित के संपर्क में (ट्रेस)
- 98 हजार घरों पर पहुंची टीम (हाउसहोल्ड सर्वे)
- 486253 लोग से किया संपर्क (1461 ट्र्रेस)
64 संक्रमितों की करीब ढाई हजार ही कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग हुई है। पोर्टल पर किन्हीं तकनीकी खामी की वजह से ट्रेसिंग ज्यादा दिखा रही है। जो मुख्यालय से ही ठीक होगा। - नितीश कुमार, डीएम
अब संक्रमित कम मिल रहे हैं। ऐसे में 15 दिन में 64 संक्रमित के संपर्क में 17 हजार लोेग होंगे, यह आंकड़े गलत हैं। गड़बड़ी कहां हुई है, इसकी जांच कराई जाएगी। - डॉ. सुधीर गर्ग, सीएमओ