जिला अस्पताल के लिए हर दिन सक्रिय रहना जरूरी है, फिर चाहे दिन छुट्टी का ही क्यों न हो। वजह यह है कि छुट्टी में ओपीडी भले ही बंद रहती हो पर मरीज भर्ती रहते हैं। रविवार को अमर उजाला की टीम ने जिला अस्पताल का हाल जाना तो सेवाएं सुस्ती नजर आईं। ओपीडी तो बंद ही रही पर वार्डों में डॉक्टर सुबह के बजाय दोपहर में ही पहुंचे। कई मरीजों को दवा तक नहीं मिल पाई। हालांकि, कुछ मरीजों ने व्यवस्था पर संतोष जताया।
दोपहर में आए डॉक्टर
चौपुला की मीनाक्षी ने बताया कि उसने अपने ढाई साल के बच्चे रुद्र को उल्टी-दस्त होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वैसे तो डॉक्टर सुबह के समय राउंड पर आते थे, लेकिन रविवार को दोपहर में आए। बच्चे का इलाज नर्सों के ही सहारे चला।
सुबह से नहीं मिली दवा
जसौली के तैय्यब शुक्रवार को जीने से पैर फिसलने से घायल हो गए थे। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया गया कि रविवार सुबह से उन्हें दवा नहीं मिली। दोपहर तीन बजे तक उन्हें दवा न मिलने से तीमारदार काफी परेशान दिखे। वहीं, बच्चा वार्ड में भर्ती कटघर की आठ साल की सोनम को भी सुबह से दवा नहीं मिली।
जांच भी नहीं हुई
जिला अस्पताल में भर्ती 60 वर्षीय परवेज को सुबह के समय तबियत खराब होने पर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने इलाज तो शुरू कर दिया, लेकिन रविवार की छुट्टी के कारण उनकी जांचें नहीं हो पाईं।
ब्लड बैंक खुला, लेकिन रहा सन्नाटा
रविवार को जिला अस्पताल का ब्लड बैंक तो खुला, लेकिन यहां सन्नाटा रहा। सिर्फ एक मीना नाम की महिला ब्लड ले गई। बताया जाता है कि उसने शनिवार को ही ब्लड एक्सजेंस कराकर ब्लड बैंक में रख लिया था ताकि संडे के दिन ब्लड मिलने में दिक्कत न हो।
खाना भी बनाया
जिला अस्पताल कैंपस में ही नया भवन बना है। इसमें मरीज भी शिफ्ट कर दिए गए हैं। काफी संख्या में मरीज भर्ती हैं। भवन के ऊपर जाने वाले जीने के नीचे तीमारदारों ने लाइन से अपना सामान रख लिया। कुछ लोग यहां छोटा गैस सिलेंडर रखकर खाना पकाते भी नजर आए।
ठीक से मिला इलाज
रोहित की पत्नी तुलसी छह दिन से जिला अस्पताल में भर्ती है। उसने बताया कि अब तक उन्हें इलाज में कोई दिक्कत नहीं आई है। संडे को भी उन्हें इलाज ठीक से मिला।
बच्चा वार्ड के पास सो रहे थे कुत्ते
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड के पास कुत्ते सोते नजर आए। सफाई कर्मी भी नजर नहीं आए। कई जगह गंदगी भी पड़ी मिली।
संडे को थोड़ी देर हो ही जाती है। फिर भी दस बजे तक सब डॉक्टर राउंड पर थे। सभी वार्डों में दवाइयां उपलब्ध थीं। ऐसे में इलाज में किसी भी तरह की कमी का सवाल ही नहीं उठता है।
- केसी गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल