फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक दिन में चार युवाओं ने की खुदकुशी

विज्ञापन
विज्ञापन
शाहजहांपुर। अलग-अलग घटनाओं में चार युवकों ने जान देदी। दो घटनाएं पुवायां और एक-एक मामला कांट और खुदागंज का है। इसमें एक मामले में पुलिस को सूचना दिए बिना ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। तीन मामलों में पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
विज्ञापन

खुदागंज : बंटवारे के विवाद में युवक ने तमंचे से गोली मारकर जान दी
खुदागंज। शनिवार सुबह पहाड़ीपुर भोपत गांव के कल्याण उर्फ कल्लू (28) ने तमंचे से सिर पर गोली मारकर जान दे दी। आत्महत्या की वजह परिजन से बंटवारे का विवाद सामने आ रहा है।
खुदागंज क्षेत्र के गांव पहाड़ीपुर भोपत गांव में कल्यान उर्फ कल्लू ने शनिवार सुबह लगभग नौ बजे तमंचे से खुद को गोली मार ली। गोली चलने की आवाज सुनकर पत्नी कमरे में पहुंची तो कल्याण खून में लथपथ पड़ा हुआ था।
विज्ञापन

परिजन कल्यान को प्राइवेट गाड़ी से अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे लेकिन उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। घटना की प्रधान ने पुलिस को जानकारी दी। खुदागंज थाना प्रभारी निरीक्षक वकार अहमद खान मौके पर पहुंच गए। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि पिता और भाइयों से कल्याण का बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। इसी बात से कल्याण नाराज था। ऐसे में उसने सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। कल्याण उर्फ कल्लू की शादी सात वर्ष पहले रेनू से हुई थी। उसकी चार और दो वर्ष की दो पुत्रियां हैं। युवक तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था।
बंडा में घरेलू कलह में युवक ने जहर खाकर आत्महत्या की
पुवायां। घरेलू कलह में युवक ने जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिवार के लोगों को जानकारी हुई तो युवक को इलाज के लिए ले जाया गया। इलाज के दौरान मौत हो जाने पर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
बंडा के गांव इंदलपुर निवासी गंगाराम के 24 वर्षीय पुत्र संजीव की शुक्रवार रात दस बजे घर में किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। नाराज संजीव ने घर में रखा जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर जानकारी हुई तो परिवार के लोगों ने संजीव को बंडा सीएचसी पर भर्ती कराया।
डॉक्टर ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान संजीव ने दम तोड़ दिया। सूचना पाकर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है। संजीव की एक वर्ष पूर्व शादी हुई थी। संजीव की मौत से पत्नी, मां सहित परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। अभी इस मामले में कोई तहरीर नहीं दी गई है।
पुवायां : बहन की शादी के तीसरे दिन युवक ने फंदे से लटका
पुवायां। बंडा में बहन की शादी के तीसरे दिन युवक ने फंदे से लटक कर जान दे दी। इससे घर में कोहराम मचा गया।
बंडा के एक गांव निवासी 19 वर्षीय युवक की बहन की एक जुलाई को शादी थी। शादी के बाद युवक ने टेंट आदि के सामान को दुकान पर पहुंचाया और शराब पीकर घूमने लगा। परिवार के लोगों ने उसे नशे में देखकर फटकार लगाई और चुप होकर घर बैठने को कहा। फटकार से नाराज युवक ने शुक्रवार रात गांव से बाहर एक पेड़ पर फंदे से लटक कर जान दे दी। युवक के देर तक वापस नहीं आने पर शुक्रवार रात में ही तलाश की गई, लेकिन कोई पता नहीं चल सका।
शनिवार को लोगों ने युवक को फंदे से लटकता देखकर परिवार के लोगों को सूचना दी तो घर में कोहराम मच गया। शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। मौके पर पहुंचे परिवार वालों ने शव को नीचे उतारने के बाद आनन फानन में अंतिम संस्कार कर दिया। युवक की मौत से परिवार में गम का माहौल है। परिवार के लोग इस संबंध में जानकारी देने से बच रहे हैं। पुलिस ने मामले की जानकारी से इनकार किया है।
कांट : पेड़ से लटका मिला युवक का शव
शाहजहांपुर। शुक्रवार की शाम कांट थाना क्षेत्र के गांव गंधार निवासी सोनपाल (35) ने गांव के एक खेत में गमछे से फंदा बनाकर पेड़ से लटककर जान दे दी। खेतों पर जा रहे ग्रामीणों ने पेड़ से लटकते हुए शव को देखकर परिजन और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार सोनपाल शराब का आदी था। सोनपाल की पत्नी विमला देवी और दो बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। संवाद
खुद को खत्म करने का विचार आए तो मनोचिकित्सक से सलाह लेने में न करें संकोच : डॉ. अभिनव
मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि आत्महत्या जिंदगी का सबसे खतरनाक फैसला है। जीवन में कई स्थितियां ऐसी बनती हैं, जब इंसान उससे लड़ नहीं पाता। जब उसे समस्या का निदान नहीं दिखता तो उसके पास एकमात्र विकल्प आत्महत्या समझ में आती है। मगर ऐसा होता नहीं है। आत्महत्या का विचार किसी के भी मन में आ सकता है। चाहे वह शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, अभिनेता, राजनेता, अफसर या फिर आम आदमी हो। आत्महत्या के संबंध में यह तर्क मनगढ़ंत हैं कि पढ़े-लिखे लोग आत्महत्या कम करते हैं या नहीं करते। मनोचिकित्सकों का मानना है कि अवसाद का शिकार कोई भी व्यक्ति आत्महत्या कर सकता है। यह सामाजिक कलंक नहीं, बल्कि एक बीमारी है। इसको समझने की जरूरत है। आमतौर पर परिवार में दिक्कत, समस्याएं बनी रहना, आर्थिक समस्या पैदा होना, नौकरी चली जाना, प्रियजन की मौत होना आदि वजह से आत्महत्या करने के विचार मन में आते हैं। आजकल बच्चों में भी आत्महत्या करने के विचार आने लगे हैं, जिसका कारण इंटरनेट या फिर पढ़ाई का दबाव होना है। बताया कि अगर कोई व्यक्ति अवसाद में है तो वह उदास रहने लगता है। थकान और निराशावादी रहना, खुद को एकांत में रखने की चाहत रहती है। अधिक अल्कोहल का उपयोग करने वाले भी आत्महत्या करना चाहते हैं। वे सोचते हैं कि अब उनके जाने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। डॉ. अभिनव ने कहा कि यह एक बीमारी है, जिसके लक्षण दिखाई देने पर मनोचिकित्सक से संपर्क करें। परेशानियों को रिश्तेदार, दोस्तों से साझा करने और डॉक्टर की सलाह लेने में संकोच न करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें