केसर चीनी मिल की जमीन के मूल्य आकलन में कम कीमत होने पर नीलामी रोकी गई
बहेड़ी। केसर चीनी मिल की मुड़िया मुकर्रमपुर स्थित कृषि भूमि की नीलामी सोमवार को नहीं हो सकी, जिससे किसानों को जल्द से जल्द भुगतान मिलने की उम्मीदों को झटका लगा है। अब भुगतान के लिए किसानों का इंतजार और बढ़ गया है। बेची जाने वाली जमीन के मूल्यांकन का आकलन 22 करोड़ 73 लाख रुपये में आंका गया, जो कि बहुत कम था। अब इसका दोबारा से आकलन कराकर नीलामी की नई तिथि घोषित की जाएगी।
क्षेत्र के किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान अदा न करने पर चीनी मिल की जमीन कुर्क कर 15 सितंबर की नीलामी की तिथि घोषित की गई थी, लेकिन सोमवार को होने वाली नीलामी रोक दी गई। एसडीएम रत्निका श्रीवास्तव ने बताया जिलाधिकारी के निर्देश पर इस जमीन का दोबारा आकलन कराया जाएगा क्योंकि पूर्व में 70 करोड रुपये का आकलन किया गया था, लेकिन अप निबंधन कार्यालय द्वारा इसका आकलन 22 करोड़ 73 लाख रुपये किया गया था। अब दोबारा से आकलन होने के बाद नीलामी की नई तिथि घोषित की जाएगी।
सूत्र बताते हैं कि चीनी मिल प्रबंधन इस नीलामी को रोकने के प्रयास में न्यायालय में पहुंच गया है। जब तक जमीन का आकलन होगा, तब तक इसकी नीलामी पर स्टे आ जाएगा। इसके बाद इसकी नीलामी नहीं हो पाएगी और किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान भी अटका रहेगा।
किसान नेता ने प्रक्रिया पर उठाया प्रश्न
भारतीय किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने कहा कि केसर चीनी मिल प्रबंधन अपनी जमीन की नीलामी को बचाने में कामयाब हो गया। क्षेत्र के किसानों का 166 करोड़ रुपये मिलना अब नामुमकिन है। प्रशासन ने जमीन का आकलन करने के बाद नीलामी की तिथि घोषित की थी। उप निबंधक कार्यालय ने सरकारी मूल्य के अनुसार ही इसका आकलन किया था। खुली नीलामी में यह जमीन बहुत ऊंची कीमत में जाती, लेकिन चीनी प्रबंधन को राहत देने के लिए जमीन की कीमत का आकलन कम होने की बात बताते हुए प्रशासन ने इसकी नीलामी को टाल दिया। राजेश गुप्ता ने कहा कि प्रशासन की इस नीति के खिलाफ जिला अधिकारी कार्यालय पर भारतीय किसान यूनियन क्षेत्र के गन्ना किसानों के हित के लिए नीलामी को लेकर धरना देगा।