सड़कें बंद होने से भी आपूर्ति प्रभावित
सावन के दौरान कई मार्ग बंद किए जाने से भी चीनी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। लखीमपुर और गोला क्षेत्र से आने वाली गाड़ियों को रास्ते बंद होने के कारण कई दिन तक इंतजार करना पड़ा। इससे माल की ढुलाई का समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ी। कारोबारियों के अनुसार इसका असर माल की कीमत पर भी पड़ता है। महंगा ईंधन भी वजह बना।
इन मिलों का खत्म हुआ स्टॉक
बहेड़ी की केसर और बहादुरगढ़ चीनी मिलों का स्टॉक निल है। बहादुरगढ़ चीनी मिल इस पेराई सत्र में महज 10 दिन ही चली। केसर चीनी मिल ने स्टॉक की बिक्री कर किसानों को भुगतान कर दिया। दोनों मिलों के अधिकारियों ने बताया कि स्टॉक में चीनी नहीं है। मीरगंज स्थित धामपुर शुगर मिल का पूरा स्टॉक गोरखपुर की फर्म ने खरीद लिया है।
मिल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि इस समय मिल के पास चीनी, शीरा या अन्य कोई उत्पाद उपलब्ध नहीं है। फरीदपुर की द्वारिकेश चीनी मिल के पास स्टॉक में 1.33 लाख और सेमीखेड़ा की सहकारी चीनी मिल के स्टॉक में 90 हजार क्विंटल चीनी उपलब्ध है। दोनों मिलें खुले बाजार में चीनी की बिक्री के साथ निर्यात भी करती हैं। जिला गन्ना अधिकारी दिलीप कुमार सैनी ने बताया कि दोनों मिलों के स्टॉक की जांच की गई है।
गन्ने की प्रजाति में रोग से घटा उत्पादन
गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर के वैज्ञानिक डॉ. संजीव पाठक ने बताया कि बरेली, पीलीभीत, बदायूं, शाहजहांपुर गन्ना बेल्ट है। इसमें बड़े पैमाने पर गन्ने की 0238 प्रजाति का उत्पादन होता था। इस प्रजाति में चीनी का परता भी बेहतर आता था। इसके लाल सड़न रोग से ग्रस्त होने से पिछले तीन-चार चार साल से चीनी का उत्पादन गिर रहा है। संस्थान ने नई और उन्नत प्रजातियां 213, 235, 1231, 1923 विकसित की हैं। पूरी गन्ना बेल्ट में इन प्रजातियों के बीज हर सीजन में वितरित किए जा रहे हैं।