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यूपी: त्योहारी सीजन में दोगुनी हुई चीनी की मांग, बरेली की दो मिलों का स्टॉक खत्म; अभी और बढ़ेगी कीमत

Mon, 24 Aug 2026 08:53 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। बढ़ती कीमतों के बीच त्योहारी सीजन में चीनी की मांग भी दोगुनी हो गई है। बरेली जिले की दो मिलों में चीनी का स्टॉक खत्म हो गया है। हालांकि व्यापारी बाजार में चीनी उपलब्ध होने की बात कह रहे हैं। 
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महंगी हुई चीनी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में माहभर में ही चीनी के दाम में 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी आई है। त्योहारी सीजन में इसकी मांग दोगुनी हो गई है। जिले की दो मिलों ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए अपना पूरा स्टॉक बेच दिया है। हालांकि, थोक कारोबारी बाजार में चीनी उपलब्ध होने का दावा कर रहे हैं। साथ ही, सितंबर तक कीमतों में तेजी बने रहने का अनुमान भी जता रहे हैं।

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होलसेल शुगर एसोसिएशन बरेली के महामंत्री श्रीकृष्ण अग्रवाल के मुताबिक, त्योहारी सीजन की मांग के मुताबिक मिलों के पास पर्याप्त चीनी का बैलेंस नहीं है। अगस्त और सितंबर में तक आपूर्ति चल सकती है, पर दीपावली के दौरान चीनी की मांग तेजी से बढ़ती है। चीनी की सालाना खपत का चौथाई हिस्सा त्योहारी सीजन में बिक जाता है। इधर, महंगाई और स्टॉक कम होने की आशंका से भी चीनी की खरीदारी बढ़ गई है। पांच कट्टे चीनी खरीदने वाले रिटेल व्यापारी अब 10 कट्टे खरीद रहे हैं। इससे दाम में तेजी बने रहने के आसार हैं।

कारोबारियों के मुताबिक, सरकार ने चीनी कारोबारियों के लिए 4000 क्विंटल चीनी को अधिकतम 30 दिनों तक भंडारित करने की सीमा निर्धारित की है। थोक बाजार में रोजाना 500 से 700 क्विंटल तक चीनी का कारोबार होता है। अमूमन व्यापारियों के पास दो से छह दिन तक का स्टॉक ही रहता है। किसी कारोबारी के पास अधिकतम एक हजार क्विंटल स्टॉक हो सकता है, पर यह जमाखोरी नहीं है।

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सड़कें बंद होने से भी आपूर्ति प्रभावित
सावन के दौरान कई मार्ग बंद किए जाने से भी चीनी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। लखीमपुर और गोला क्षेत्र से आने वाली गाड़ियों को रास्ते बंद होने के कारण कई दिन तक इंतजार करना पड़ा। इससे माल की ढुलाई का समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ी। कारोबारियों के अनुसार इसका असर माल की कीमत पर भी पड़ता है। महंगा ईंधन भी वजह बना।



इन मिलों का खत्म हुआ स्टॉक
बहेड़ी की केसर और बहादुरगढ़ चीनी मिलों का स्टॉक निल है। बहादुरगढ़ चीनी मिल इस पेराई सत्र में महज 10 दिन ही चली। केसर चीनी मिल ने स्टॉक की बिक्री कर किसानों को भुगतान कर दिया। दोनों मिलों के अधिकारियों ने बताया कि स्टॉक में चीनी नहीं है। मीरगंज स्थित धामपुर शुगर मिल का पूरा स्टॉक गोरखपुर की फर्म ने खरीद लिया है। 

मिल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि इस समय मिल के पास चीनी, शीरा या अन्य कोई उत्पाद उपलब्ध नहीं है। फरीदपुर की द्वारिकेश चीनी मिल के पास स्टॉक में 1.33 लाख और सेमीखेड़ा की सहकारी चीनी मिल के स्टॉक में 90 हजार क्विंटल चीनी उपलब्ध है। दोनों मिलें खुले बाजार में चीनी की बिक्री के साथ निर्यात भी करती हैं। जिला गन्ना अधिकारी दिलीप कुमार सैनी ने बताया कि दोनों मिलों के स्टॉक की जांच की गई है।
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गन्ने की प्रजाति में रोग से घटा उत्पादन
गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर के वैज्ञानिक डॉ. संजीव पाठक ने बताया कि बरेली, पीलीभीत, बदायूं, शाहजहांपुर गन्ना बेल्ट है। इसमें बड़े पैमाने पर गन्ने की 0238 प्रजाति का उत्पादन होता था। इस प्रजाति में चीनी का परता भी बेहतर आता था। इसके लाल सड़न रोग से ग्रस्त होने से पिछले तीन-चार चार साल से चीनी का उत्पादन गिर रहा है। संस्थान ने नई और उन्नत प्रजातियां 213, 235, 1231, 1923 विकसित की हैं। पूरी गन्ना बेल्ट में इन प्रजातियों के बीज हर सीजन में वितरित किए जा रहे हैं।
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