रॉटविलर, पिटबुल भी पल रहे
नगर निगम ने 23 नस्ल को प्रतिबंधित माना है। इसमें पिटबुल, अमेरिकन बुलडॉग, रोडेशियन रिजबैक, साउथ रशियन शेफर्ड डॉग, रॉटविलर, पिटबुल टेरियर, वोल्फ डॉग, मास्को गार्ड, केन कार्सो, जापानीज टोसा, अकीता, मस्तीफ, कैनेरियो, बैंडडॉग, टोसा इनू, काकेशियन शेफर्ड डॉग, फिला ब्राजीलेरियो, अक्वाश, सेंट्रल एशियन शेफर्ड डॉग, टेरियर्स, अमेरिकन स्टैफोर्डशायर टेरियर, कैंगल, डोगो अर्जेंटीनो, बोजबोएल, तोरनजैक सरप्लैनिनॉक शामिल हैं। अब तक के सर्वे में शहर में रॉटविलर, केन कोरसो, पिटबुल नस्ल के कुत्तों के पाले जाने का पता चला है।
वर्ष 2015 से खूंखार नस्ल पालने का चलन, अब भा रहे टॉय डॉग
डॉग ब्रीड एक्सपर्ट पम्मी सिविल लाइंस में 25 वर्षों से पेट शॉप संचालित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि तब लोग विदेशी नस्ल में पग, लैब्राडोर पालते थे। 2005 के बाद जर्मन शेफर्ड, डाबरमैन खूब पले। 2015 के बाद खूंखार नस्ल लोगों की पसंद बनी। रॉटविलर, पिटबुल, केन कोरसो की मांग बढ़ी। घातक हमले सुर्खियां बने तो क्रेज घटा। अब टॉय ब्रीड सिटजू, पाम की मांग बढ़ी है।