स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक साहूकारा में रहने वाले 70 वर्षीय बुजुर्ग किडनी की बीमारी से ग्रसित थे। तबीयत खराब होने पर पहले उन्हें पीलीभीत बाईपास पर किडनी का इलाज करने वाले एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिन वहां भर्ती रहने के बाद बाद परिवार उन्हें स्टेडियम रोड पर दूसरे अस्पताल में ले आया था। यहां आने के बाद बुजुर्ग की हालत और बिगड़ी तो 20 मई को डॉक्टरों ने उनमें कोरोना संक्रमण की आशंका जताते हुए उनका सैंपल लेकर जांच कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग में आईडीएसपी को सौंपा था। सैंपल लेने के करीब 15 मिनट बाद ही बुजुर्ग की मौत हो गई।
आईसीएमआर की गाइड लाइन के मुताबिक बुजुर्ग का सैंपल लिया जा चुका था लिहाजा उनका शव रिपोर्ट आने से पहले उनके परिवार को नहीं सौंपा जा सकता था। लेकिन स्टेडियम रोड के जिस अस्पताल में वह भर्ती थे, उसके डॉक्टरों की सफाई है कि बुजुर्ग के घरवालों ने शव लेने के लिए हंगामा शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्होंने जिला सर्विलांस अधिकारी को फोन कर मार्गदर्शन मांगा। जिला सर्विलांस अधिकारी को जब यह बताया गया कि बुजुर्ग की मौत किडनी फेल होने से हुई है और उनमें कोरोना के लक्षण नहीं दिख रहे हैं तो उन्होंने शव को पूरी तरह कवर करने के साथ परिवार को गाइडलाइन के तहत अंतिम संस्कार करने की हिदायत के साथ शव परिवार को दे देने को कह दिया। इसके बाद अस्पताल से बुजुर्ग का शव उनके परिवार को दे दिया गया।
डॉक्टरों ने बताया था कि सिर्फ
एहतियातन लिया है सैंपल
जिला सर्विलांस अधिकारी/एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम का कहना है कि अस्पताल से उन्हें जानकारी दी गई थी कि बुजुर्ग की मौत किडनी फेलियर से हुई है और उनमें कोरोना के कोई लक्षण भी नहीं थे। डॉक्टरों ने बताया कि सिर्फ एहतियातन बुजुर्ग का सैंपल लेकर उन्होंने जांच के लिए भेजा है। इसीलिए कोविड-19 की गाइड लाइन के मुताबिक शव को पैक कर परिजनों को देने और उन्हें किस तरह अंतिम संस्कार करना है, इसके गाइडलाइन की जानकारी देने को कहा था। बुजुर्ग में कोरोना संक्रमण कहां हुआ, अब इसकी पड़ताल सर्विलांस टीम कर रही है।
बुजुर्ग में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद दोनों निजी अस्पतालों में उनका इलाज करने वाले डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ के साथ बाकी सभी लोगों को क्वारंटीन कर दिया गया है। बुजुर्ग अस्पतालों के जिन वार्ड में भर्ती थे, उन्हें सैनिटाइज भी कराया गया है। दोनों अस्पताल अब दावा कर रहे हैं कि इन्फेक्शन प्रिवेन्शन प्रोटोकॉल लागू होने की वजह से उन्होंने बुजुर्ग को कोविड-19 का संदिग्ध संक्रमित मानते हुए इलाज किया था।
बरेली। कोरोना का साया सिर के ऊपर होने के बावजूद जिला महिला अस्पताल में भी बड़ी लापरवाही की गई। एक तरफ गर्भवती महिला को संदिग्ध संक्रमित मानते हुए उसका सैंपल लिया गया और दूसरी तरफ ऑपरेशन से उसका प्रसव करने के बाद उसे आइसोलेट करने के बजाय प्राइवेट वार्ड में भर्ती करा दिया गया। अब रिपोर्ट में महिला के पॉजिटिव निकलने के बाद स्टाफ के कई लोगों को क्वारंटीन होने के निर्देश दिए गए हैं।
आशंका यह भी है कि संक्रमित महिला की देखभाल करने वाली डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के जरिये संक्रमण उन आम मरीजों तक भी पहुंच सकता है जो इस दौरान महिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे होंगे या फिर भर्ती रहे होंगे। हालांकि फिलहाल इस खतरे पर बात नहीं की जा रही है। महिला अस्पताल का स्टाफ पूरे जिला अस्पताल के लिए भी अब आशंका पैदा कर रहा है।
साहूकारा के बुजुर्ग और गोंडा की रहने वाली प्रसूता के अलावा छह और संक्रमित मुंबई और जयपुर से लौटे प्रवासी हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक फरीदपुर फरखपुर की संक्रमित मिली 50 वर्षीय महिला, 12 वर्षीय किशोरी और 35 वर्षीय युवक पहले संक्रमित मिले युवक के परिवार के सदस्य हैं। ये लोग पहले से ही क्वारंटीन थे। इनका सैंपल लेकर आईवीआरआई भेजा गया था। रामनगर सिरौली, मझगवां के अलीगंज और आंवला के रामनगर के रहने वाली तीनों युवक मीरगंज के खैलम और रामनगर के सिरौली के संक्रमित युवक के साथ मुंबई से वापस आए थे।
बरेली। रविवार को आठ संक्रमितों की रिपोर्ट आने के बाद फिर जांच में हो रही देरी पर सवाल खड़े कर दिए। स्वास्थ्य विभाग ने साफ तौर पर कहा कि रविवार को जिन नमूनों की रिपोर्ट मिली वे 19, 20 और 21 मई को लिए गए थे। अब भी इनमें से कुछ सैंपल की रिपोर्ट मिलनी बाकी हैं। स्वास्थ्य विभाग इसकी वजह से संक्रमितों के संपर्क में आने वालों की संख्या भी ज्यादा होने की आशंका जता रहा है।
सैंपल की रिपोर्ट मिलने में हो रही देरी की वजह चाहे जो हो मगर इसका सीधा असर अब कोरोना के खतरे से जूझ रहे जिले पर पड़ता दिख रहा है। खतरा यह भी है कि रविवार को जिन संक्रमितों की रिपोर्ट मिली वे सभी एसिम्प्टोमैटिक हैं। स्वास्थ्य विभाग की सफाई है कि लक्षण न होने के कारण ही जिला महिला अस्पताल में भर्ती रही प्रसूता और साहूकारा के बुजुर्ग को संक्रमित नहीं माना गया और उनके आसपास आवाजाही जारी रही। यह भी आशंका जताई जा रही है कि समय से रिपोर्ट न मिलने की वजह से उनके संपर्क में आने वाला स्टाफ और परिवार के लोग भी अब तक तमाम लोगों के संपर्क में आ चुके होंगे।
स्वास्थ्य विभाग के आरोपों के मामले में आईवीआरआई का पक्ष जानने के लिए उसके नोडल अफसर और निदेशक को कई बार फोन करने के बावजूद उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। उधर, जिला सर्विलांस अधिकारी एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने साफ कहा कि रविवार को मिली सभी रिपोर्ट तीन से चार दिन पहले भेजे गए सैंपल की हैं। रिपोर्ट मिलने में देरी की क्यों हो रही है, इस पर उन्होंने जानकारी से इनकार कर दिया है।