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‘रोवर-रेंसर्ज समागम 2020’ मेें जुटे कई महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं

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बरेली कॉलेज में समोराह का उद्घाटन करते प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन भटनागर। - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। बरेली कॉलेज में शनिवार को तीन दिवसीय 23वां अंतर महाविद्यालयीय रोवर्स रेंजर्स समागम 2020 का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन डीएम नितीश कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप जलाकर किया। जिलाधिकारी नितिश कुमार ने गुब्बारे और सफेद कबूतर के जोड़े छोड़कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कैडेट्स को देश के प्रति समर्पित भाव से काम करने और अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा दी।
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कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों से आए रोवर रेंजर्स के कैडेट्स ने अतिथियों के सामने मार्च पास्ट कर उन्हें सलामी दी। कैडेट्स के मार्च पास्ट के दौरान बैंड पर बज रही धुन ने दर्शकों में जोश भर दिया। इस दौरान विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं वहां के रोवर रेेंजर्स लीडर के साथ स्काउट गाइड के प्रतिभागी भी उपस्थित रहे। अध्यक्षता बरेली कॉलेज के प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष काजी अलीमुद्दीन और संचालन चीफ प्रॉक्टर डॉ. वंदना शर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एसी त्रिपाठी ने दिया।
प्राचार्य डॉ. अनुराग और डॉ. पूर्णिमा दिखे असहज
कार्यक्रम में उस समय बहुत अजीब स्थिति पैदा हो गई जब डीएम के बाद प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन स्टेज पर मां सरस्वती की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलन को पहुंचे। उस दौरान उनकी नजर सामने खड़ीं डॉ. पूर्णिमा अनिल से मिलीं तो दोनों असहज हो उठे। दरअसल, शुक्रवार को कोर्ट ने डॉ. पूर्णिमा अनिल के मामले में सुनवाई करते हुए रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति को इस मामले का निस्तारण कर रिपोर्ट देने और कोर्ट को इसकी जानकारी देने को कहा है। इसे लेकर बरेली कॉलेज में तनातनी की स्थिति बनी हुई है।
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पंडाल लगाया बड़ा, कुर्सियां रह गईं खाली
तीन दिवसीय इस कार्यक्रम को लेकर बरेली कॉलेज की ओर से काफी बड़ा पंडाल लगा दिया गया था। सैकड़ों कुर्सियां और अन्य व्यवस्था को बड़े स्तर पर संयोजित किया गया था। हालांकि मौके पर बहुत ही कम लोग आए और कुर्सियां खाली दिखीं।

आयोजन से जुड़े शिक्षक ही रहे मौजूद
इस बात की भी चर्चा रही कि कार्यक्रम में आयोजन से जुड़े शिक्षकों के अलावा कोई और शिक्षक नहीं दिखा। कुछ शिक्षकों ने कार्यक्रम मेें अन्य शिक्षकों को ना बुलाए जाने की भी बात कही तो कुछ ने इसके लिए वर्तमान में महाविद्यालय में चल रही खेमेबंदी को जिम्मेदार ठहराया।
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