रुहेलखंड विश्वविद्यालय के केमिकल इंजीनियरिंग छात्रों की रिसर्च
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अपेक्षाकृत सस्ता और ज्यादा कारगर सैनिटाइजर बनाने का दावा
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में केमिकल इंजीनियरिंग अंतिम वर्ष के छात्रों ने महुआ के पेड़ से निकले रस से कोरोना वायरस को नष्ट करने के लिए कारगर सैनिटाइजर बनाने का रास्ता तलाश किया है। छात्रों ने इस सैनिटाइजर में एक केमिकल का भी इस्तेमाल किया है जो जीवाणुओं को नष्ट करने में सक्षम बताया जा रहा है।
महुआ के रस से सैनिटाइजर बनाने वाले छात्रों के मुताबिक कोरोना से बचाव के लिए अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग जरूरी है। अल्कोहल का ज्यादातर उत्पादन गन्ने से ही होता है लेकिन महुआ के पेड़ से निकले रस से भी अल्कोहल बनाया जा सकता है और उसका सैनिटाइजर बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। छात्रों के मुताबिक सैनिटाइजर में उन्होंने एसेंशियल नाम के एक ऐसे तेल का भी इस्तेमाल किया है जो जीवाणुओं को नष्ट करने में बेहद कारगर है। फार्मेसी विभाग के शिक्षक अमित वर्मा के निर्देशन में सैनिटाइजर बनाने वाले छात्रों का कहना है कि महुआ से सैनिटाइजर तैयार करने को इथेनॉल, कपूर, ग्लिसरीन जैसे कुछ रसायनों का प्रयोग किया गया है। यह सैनिटाइजर बनाना ज्यादा महंगा भी नहीं है।
छात्रों के मुताबिक सैनिटाइजर बनाने का तरीका भी कुछ खास मुश्किल नहीं है। एक बर्तन में साफ पानी लेकर उसमें महुआ भिगोया जाता है और फिर तुरंत उसमें खमीर डाला जाता है। इसके बाद इसे 72 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। इस दौरान इसमें शुगर की मात्रा कम और एथेनॉल में वृद्धि होती है। इसे 25 डिग्री तापमान पर तैयार किया जाता है। इसके बाद कुछ और भी रासायनिक प्रक्रियाओं को पूरा किया जाता है।