बरेली। रुविवि में इंजीनियरिंग की सूरत बदल रही है। छात्रों का रुझान कंप्यूटर साइंस की ओर बढ़ा है। इसकी सीटें दो साल में दोगुनी हो गई हैं। वहीं, इंजीनियरिंग की रीढ़ कही जाने वाली शाखाएं (मैकेनिकल, केमिकल और इलेक्ट्रिकल) की सीटें या तो स्थिर हैं, या कम हुई हैं। फिलहाल, सरकार आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन दे रही है। इनमें कोर ब्रांचों की महत्वपूर्ण भूमिका है। दूसरी ओर, सीएसआईटी में अधिक प्रवेश से सभी छात्रों के प्लेसमेंट की चुनौती है। कुलपति के मुताबिक, इसकी निगरानी की जा रही है।
रुविवि के इंजीनियरिंग विभाग में कंप्यूटर साइंस एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (सीएसआईटी), इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंटेशन, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, केमिकल इंजीनियरिंग व इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन पाठ्यक्रम संचालित हैं। पहले सभी कोर्स में 60-60 सीटें निर्धारित थीं, जिनमें अधिकतम 73 अभ्यर्थी प्रवेश ले सकते थे।
अभियांत्रिकी विभाग की डीन प्रो. अर्चना ने बताया कि मार्केट ट्रेंड के मुताबिक, दो साल में छात्रों का रुझान सीएसआईटी की ओर बढ़ा है। इसके अनुरूप सीटें भी बढ़ाई गई हैं। कोर ब्रांच केमिकल इंजीनियरिंग की केवल 30 सीटें रह गई हैं। मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंटेशन में सीटें स्थिर हैं। हालांकि, अन्य ब्रांचों में भी अच्छे अवसर हैं। सभी ब्रांच के इंजीनियरों की बाजार में डिमांड है। अभी विद्यार्थी केवल एआई मार्केट की ओर ही आकर्षित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई ) को कुछ और कोर्स भी स्वीकृति के लिए भेजे हैं। इनमें सीएसआईटी का आर्टिफिशियल इंजीनियरिंग और मशीन लर्निंग भी शामिल है।
ब्रांच 2025 । 2024 । 2023 । 2022
सीएसआईटी 136 143 75 76
इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन 66 59 66 59
इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंटेशन इंजी. 50 59 37 4
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग 49 36 56 31
मैकेनिकल इंजीनियरिंग 45 27 36 27
केमिकल इंजीनियरिंग 22 28 36 18
सीएसआईटी विभाग में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। एक बार में सभी का प्लेसमेंट संभव नहीं है। अगले तीन साल में इनका प्लेसमेंट कराना और चुनौतीपूर्ण होगा। इसके लिए एल्युमिनाई से संपर्क किया जा रहा है। आगामी सप्ताह में एक कंपनी को बुलाया है। एआई के आने के बाद प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इस क्षेत्र की डिमांड-सप्लाई का अनुपात डगमगाया हुआ है। - डॉ. मनोज कुमार, प्रभारी, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल रुविवि
कंप्यूटर साइंस के कोर्स की तरफ नेशनल ट्रेंड चल रहा है। कई निजी विश्वविद्यालयों में अन्य ब्रांच बंद करके केवल सीएस की पढ़ाई कराई जा रही है। हम भी मार्केट की आवश्यकता के अनुसार नए कोर्स ला रहे हैं। बीटेक एआई, बीसीए व अन्य कोर्स अगले सत्र से संचालित करेंगे। केमिकल ब्रांच में जितनी सीटें हैं, उन पर प्रवेश ठीक है। मैकेनिकल में प्रवेश कम हैं, निगरानी की जा रही है। - प्रो. केपी सिंह, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय