बरेली। भू-संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए आधार-आधारित ई-केवाईसी और बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य होने के पहले दिन सोमवार को क्रेता-विक्रेता और दस्तावेज लेखक पूरे दिन जू्झे। वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के इंतजार में रजिस्ट्री अटक गई। कुछ क्रेता-विक्रेता के आधार में पुराना मोबाइल नंबर दर्ज होने या अन्य विवरण अपडेट न होने से उनकी रजिस्ट्री नहीं हो पाई। कुछ तो आधार और पैन कार्ड में दर्ज विवरण में भिन्नता के कारण बैरंग लौट गए। दिनभर में जिलेभर के उप निबंधक कार्यालयों में कुल 233 बैनामे हुए। सामान्य दिनों में इनकी संख्या 350 के पार होती है।
सदर तहसील के उप निबंधक कार्यालय प्रथम व द्वितीय में दिनभर भीड़ रही। क्रेता-विक्रेता का आधार मैच कराने के बाद उनका अंगूठा स्कैन कर ऑनलाइन रजिस्ट्री की जा रही थी। इसमें काफी समय लग रहा था। बैनामा लेखकों के यहां भी भीड़ रही। बैनामा लेखक गोपाल वर्मा ने बताया कि अधिक दिक्कत उन विक्रेताओं को हुई, जिन्होंने अपने आधार में मोबाइल नंबर अपडेट नहीं कराया है।
बिहारीपुर की नीरू अपना 50 गज का भूखंड जगदीश को बेचने के लिए सुबह 10 बजे आ गई थीं। अपराह्न 3:30 बजे तक वह ओटीपी के इंतजार में बैठी रहीं। नीरू ने बताया कि अब वह मंगलवार को फिर आएंगी। क्यारा के बेहटी के भौरव प्रसाद ने बताया कि रजिस्ट्री के लिए उनके मोबाइल पर ओटीपी नहीं आया। दस्तावेज लेखक कल्याणकारी समिति के सदर तहसील के सचिव अतुल सक्सेना ने नई व्यवस्था को उचित बताया। कहा कि आधार से लिंक मोबाइल नंबरों में त्रुटियां हैं। ऐसे लोगों को रजिस्ट्री कराने में दिक्कत आई है। फिंगर प्रिंट लेने में भी काफी समय लग रहा है। क्रेता-विक्रेता के बैरंग लौटने से बैनामा लेखकों का भी काम प्रभावित हुआ।
सोमवार को सदर तहसील के उप निबंधक कार्यालय प्रथम में सर्वाधिक 62 और द्वितीय में 51 बैनामे हुए। फरीदपुर में 36, आंवला में 25, नवाबगंज में 23 और मीरगंज व बहेड़ी में 18-18 बैनामे हुए।
नई व्यवस्था से बैनामों में फर्जीवाड़ा पूरी तरह से थम जाएगा। अब भू-स्वामी की जमीन की रजिस्ट्री कोई अन्य व्यक्ति नहीं कर सकेगा। विवाद भी थमेंगे। पहले दिन कुछ कम बैनामे हुए हैं। - तेज सिंह यादव, सहायक महानिरीक्षक निबंधन