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पुरानी पेंशन बहाल कराने की रणनीति तैयार, जल्द करेंगे आंदोलन : अनिरुद्ध

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बरेली। पुरानी पेंशन बहाली और विसंगतियों को दूर कराने के लिए रणनीति तैयार की गई है। शासन ने जल्द ही मांगों को पूरा नहीं किया तो संगठन आंदोलन करेगा। ये बातें उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ चंदेल गुट के तीन दिवसीय प्रांतीय सम्मेलन में बुधवार को प्रदेश महामंत्री अनिरुद्ध कुमार त्रिपाठी ने कहीं। विशिष्ट अतिथि अभिषेक कौशिक ने वन नेशन वन इलेक्शन के मुद्दे को सबके सामने रखा। सम्मेलन में 14 प्रस्ताव पारित हुए।
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प्रदेश महामंत्री ने पुरानी पेंशन बहाली, शिक्षकों के नियमितीकरण, वित्तविहीन शिक्षकों के लिए नियमावली व मानदेय घोषित किए जाने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर जुलाई में सभी जिलों के डीआईओएस कार्यालयों से आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। अभिषेक कौशिक ने बताया कि बार-बार चुनाव होने से शिक्षकों को परेशानी होती है। बच्चों की पढ़ाई भी बाधित होती है। कुछ शिक्षकों ने इसका विरोध करते हुए खड़े हो गए। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि बिथरी विधायक डॉ. राघवेंद्र शर्मा ने किया। उन्होंने शिक्षक की समस्याओं के निस्तारण में सहयोग की बात कही।

संगठन की पत्रिका चाणक्य के संपादक जितेंद्र वार्ष्णेय ने संगठन की वेबसाइट के बारे में बताया। सम्मेलन के द्वितीय सत्र में प्रदेश उपाध्यक्ष मार्कंडेय सिंह, नारायण दूबे, गिरेंद्र कुशवाहा, महेश चंद्र शर्मा, नरसिंह बहादुर सिंह, सुलेखा जैन, प्रदेश मंत्री डाॅ. संजय द्विवेदी ने 14 प्रस्ताव अध्यक्षता कर रहे प्रदेश अध्यक्ष चेत नारायण सिंह व महामंत्री अनिरुद्ध कुमार त्रिपाठी के सामने रखे। प्रदेश के 75 जनपदों के जिलाध्यक्षों व मंत्रियों ने इसका खुला समर्थन किया।
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इस दौरान संगठन के संरक्षक व विधान परिषद सदस्य राज बहादुर सिंह चंदेल, वहिदुल्लाह शहीदी, पूर्व एमएलसी लवकुश मिश्रा, रजनीश चौहान, महेश चंद्र शर्मा, जिलाध्यक्ष श्याम नारायण, जिला मंत्री प्रदीप पटेल, ब्रजेश कुमार दीक्षित आदि मौजूद रहे। संवाद
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ये मुख्य प्रस्ताव हुए पारित

- केंद्र व राज्य सरकार पुरानी पेंशन योजना बहाल करें।

- शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए चयन बोर्ड 1982 की धारा 12, 18 व 21 की बहाली और धारा 11(6) में संशोधन किया जाए।

- माध्यमिक शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की तरह चिकित्सकीय सुविधाएं मिलें।

- इंटरमीडिएट शिक्षा संशोधन अधिनियम 2007 में संशोधन कर परिषद के स्वायत्तशासी स्वरूप को बहाल किया जाय।

- ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया का सरलीकरण हो।

- शिक्षकों के चयन व प्रोन्नत वेतनमान की स्वत: देयता सुनिश्चित किया जाय।

- महिला शिक्षकों की निजता का ध्यान रखते हुए विद्यालयों में समुचित व्यवस्था की जाए।

- पेंशनर को 70 वर्ष से ही अतिरिक्त पेंशन की सुविधा प्रदान की जाए।

- 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद उसकी सिफारिशों को नियत समय पर लागू किया जाए।
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