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‘दगाबाजी’ या लापरवाही... आखिर किसके शिकार हो रहे संविदा लाइनमैन

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बदायूं। पिछले तीन-चार माह के अंदर जिले में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जब टूटी लाइन जोड़ते वक्त कई संविदा लाइनमैनों की करंट लगने से मौत हो गई। जो बच गए, वो जिंदगी और मौत के बीच आज भी झूल रहे हैं। जिन लोगों की मौत हो चुकी है, उनके परिवार वालों के बुरे हाल हैं। उनकी रोजी-रोटी कैसे चल रही है, बच्चों की पढ़ाई से लेकर उनके पालन-पोषण तक के लिए उनकी महिलाएं परेशान हैं। लगातार एक के बाद एक हो रही इन घटनाओं को लेकर एक सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या ये सभी इत्तफाकिया हादसे हैं या फिर जानबूझकर इनको अंजाम दिया गया है। ये सवाल उस समय और ज्यादा बड़ा हो जाता है जब कई के परिजनों ने भी उनकी हत्या का आरोप लगाया है।
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केस: नंबर एक
-वजीरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम वरीपुरा निवासी शाहदत खां (30) पुत्र रघुराज खां स्थानीय विद्युत उपकेंद्र पर संविदा लाइनमैन था। 18 जुलाई की सुबह शाहदत शटडाउन लेकर सैंडोली के जंगल में लाइन जोड़ने गया था। उसी समय उसकी करंट लगने से मौत हो गई थी। उसके परिवार वालों ने स्टाफ पर शटडाउन खोलने का आरोप लगाया था।

केस: नंबर दो
-10 जुलाई को दातागंज कोतवाली क्षेत्र के ग्राम रोहरी निवासी ओमेंद्र (24) पुत्र नरेशपाल सिंह लाइन जोड़ने गया था। ओमेंद्र दातागंज के विद्युत उपकेंद्र पर संविदा लाइनमैन था। लाइन जोड़ने के दौरान उसकी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इस पर परिवार वालों ने एक कर्मचारी राजीव और एसडीओ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका आरोप था ओमेंद्र शटडाउन लेकर लाइन जोड़ने गया था। उसी समय शटडाउन वापस ले लिया गया था।
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केस: नंबर तीन
-यह हादसा चार जून को हुआ था। इस्लामनगर कस्बे के मोहल्ला टंकी निवासी बबलू उर्फ वेदप्रकाश (42) पुत्र पोतीराम स्थानीय विद्युत उपकेंद्र पर संविदा का लाइनमैन था। परिजनों के मुताबिक उस दिन बबलू शटडाउन लेकर लाइन जोड़ रहा था। तभी वह करंट लगने से गंभीर रूप से झुलस गया था। 18 दिन तक उसका इलाज चला। 22 जून को दिल्ली में उसकी मौत हो गई। उसके परिवार वालों ने भी शटडाउन खोलने का आरोप लगाते हुए जाम लगा दिया था।

केस: नंबर चार
-इस्लामनगर कस्बे में बहजोई स्टैंड नई बस्ती निवासी पप्पू (48) नगर के विद्युत उपकेंद्र पर संविदा लाइनमैन था। करीब छह माह पूर्व पप्पू ब्यौर चौराहे पर लाइन जोड़ रहा था। उसी समय वह करंट लगने से गंभीर रूप से झुलस गया था। परिवार वाले आज भी उसका इलाज करा रहे हैं लेकिन उसकी हालत ऐसी है कि वह कुछ कार्य नहीं कर सकता। वह अपने बच्चों और पत्नी पर आश्रित हो गया है। उस घटना को याद करता है तो उसके आंखों से आंसू नहीं थमते हैं।

फोन पर शटडाउन देने के लिए मना है, लेकिन जल्दबाजी के चक्कर में लाइनमैन फोन पर ही शटडाउन ले लेते हैं, जो गलत है। कभी-कभी ये भी होता है कि एक लाइन पर दो जगह काम चल रहा होता है, ऐसे में लाइनमैन द्वारा ओके की रिपोर्ट मिलने के बाद में लाइन को शुरू कर दिया जाता है, जिससे ये हादसे होते हैं। वैसे नियम तो ये है कि लाइनमैन सब स्टेशन से लिखित में शटडाउट लेकर जाए, साथ ही लौटकर लिखित में ही शटडाउन वापस ले।
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- प्रवीण सिंह कनौजिया, अधीक्षण अभियंता, बदायूं
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