बरेली। दो सौ से ज्यादा ज्ञात जूनोटिक बीमारियां हैं, जो पशुओं से इंसानों में होती हैं। इसकी वजह जानवर और मनुष्यों के बीच फैलने वाले रोगजनक हैं। ये संक्रमण वायरस, बैक्टीरिया, परजीवी, कवक जैसे कीटाणुओं के संपर्क में आने से होते हैं। कुछ बीमारियां जानलेवा हैं। इनसे बचाव के लिए बेहद जरूरी है कि बीमार पशुओं के संपर्क से बचें।
यह जानकारी केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान में रोटरी क्लब इज्जतनगर द्वारा आयोजित जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम, नियंत्रण के लिए जागरूकता कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार तिवारी ने दी।
बताया कि रैबीज, लाइम रोग, प्लेग, निपाह वायरस, इबोला, जीका वायरस, डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया, येलो फीवर आदि जूनोटिक रोग हैं। इनसे बचने के लिए पशुओं को हाइजीन रखने, पालतू पशु का टीकाकरण कराने, बीमार पशु के खुले घावों के संपर्क में न आने की सलाह दी। क्लब अध्यक्ष डॉ. डीके द्विवेदी ने निरोगी काया काे सुखमय जीवन का आधार बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिशा ने किया। ब्यूरो
रक्तदान की अपील ः वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अजय अग्रवाल ने डायबिटीज से बचाव के लिए पौधा आधारित भोजन पर जोर दिया। कहा कि हरी पत्तेदार सब्जी, नट्स, टमाटर, फल, दाल, गोभी, बीन्स, मटर, मसूर की दाल, साबुत अनाज, जौ आदि का सेवन करें। प्रत्येक तीन माह बाद नियमित रक्तदान करें ताकि शरीर स्वस्थ रहे और बीमारियों का पता चल सके। यहां डॉ. डीसी शुक्ला, सीए राजेन विद्यार्थी, डॉ. संदीप शरण व अन्य मौजूद रहे। ब्यूरो
आंवला। वाल्व जो फट गया था-संवाद