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वर्दी पर दागः बरेली रेंज में भ्रष्टाचार एक फीसद से भी कम!

सार

बरेली और बदायूं में 14 भ्रष्ट पुलिसकर्मी पीलीभीत और शाहजहांपुर जिला बेदाग
बिथरी चैनपुर के विधायक के सुझाव पर डीआईजी ने निकलवाया रिकार्ड
 
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राजेश पांडेय, डीआईजी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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विस्तार
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प्रधान को बंधक बनाकर फिरौती वसूलने वालों को गिरफ्तार नहीं कर पाए

बरेली। पुलिस महकमे पर भ्रष्टाचार के सबसे ज्यादा आरोप लगते हैं कि लेकिन डीआईजी के आदेश पर रेंज के चारों जिलों में जो रिकॉर्ड निकाला गया है, उसके मुताबिक भ्रष्ट पुलिस वालों की तादाद एक प्रतिशत से भी कम है। बरेली और बदायूं जिले में सिर्फ 14 भ्रष्ट पुलिस वाले चिन्हित हुए हैं और शाहजहांपुर और पीलीभीत जिला तो पूरी तरह बेदाग है। पुलिस अफसरों के रिकॉर्ड के मुताबिक इन दोनों जिलों में एक भी पुलिस वाला दागी नहीं है। वैसे रेंज के चारों जिलों में 17 से 18 हजार पुलिस वाले तैनात हैं।
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दरअसल बिथरी चैनपुर के विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल ने कुछ दिन पहले डीआईजी राजेश पांडेय को अपराधियों की तरह भ्रष्ट पुलिस वालों की भी टॉप टेन लिस्ट बनवाने की सलाह दी थी। डीआईजी ने इसके बाद रेंज के चारों जिलों से उन पुलिस वालों का रिकॉर्ड तलब किया जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं। पीलीभीत और शाहजहांपुर में तो एक भी पुलिस वाले के खिलाफ भ्रष्टाचार का रिकॉर्ड नहीं मिला। बरेली और बदायूं में जरूर ऐसे 14 पुलिस वाले मिल गए जिनके खिलाफ आठ मामले दर्ज हैं और इन सभी मामलों में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है।
बरेली में पहला नाम बहेड़ी थाने के कांस्टेबल शंकरलाल का है जिसके खिलाफ रिश्वत लेने का मामला सोशल मीडिया में उछलने के बाद रिपोर्ट लिखकर कार्रवाई की गई थी। अलीगंज थाने में ग्राम प्रधान को बंधक बनाकर सात लाख की उगाही करने वाले दरोगा नितिन कुमार और मुकेश कुमार, कांस्टेबल धनंजय और देवेंद्र का भी लिस्ट में नाम है। रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद पुलिस इन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। बाद में चारों हाईकोर्ट से स्टे भी ले आए। भुता थाने के एसओ राजवीर परमार और दरोगा हरिकेश सिंह के खिलाफ शराब भरा ट्रक वसूली करके छोड़ देने के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियिम के तहत केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने इन्हें भी गिरफ्तार नहीं किया। ये दोनों भी गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट का स्टे ले आए। फरीदपुर में कांस्टेबल ड्राइवर यशवीर और कांस्टेबल विनोद के खिलाफ भी वसूली करने के मामले में रिपोर्ट कराई गई थी। बरेली की लिस्ट में अंतिम नाम जगतपुर चौकी प्रभारी रहे योगेश गौतम का है जो दस हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे।

बदायूं में तीन दरोगा रिश्वतखोरी का वीडियो वायरल होने के बाद नपे

इस्लामनगर थाने के दरोगा यशपाल ने एक फरियादी से पांच हजार रुपये मांगे थे। दो हजार रुपये लेते हुए उनका वीडियो वायरल हुआ तो उन्हें निलंबित कर रिपोर्ट लिखाई गई। इसी थाने की नूरपुर पिनौनी चौकी के दरोगा लक्ष्मण चंद्र तीन सौ रुपये की रिश्वत लेते कैमरे में कैद हो गए तो उन्हें भी जेल जाना पड़ा। कादरचौक थाने के दरोगा हेमराज सिंह पर भी रिश्वत लेने का वीडियो वायरल होने के बाद केस दर्ज हुआ।

शासन के आदेश पर पुलिस पूरी पारदर्शिता से काम कर रही है। दूसरों पर कार्रवाई करने वाले पुलिस वालों पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित होते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है। पुलिस वालों पर रिपोर्ट होने से लेकर नौकरी जाने तक के मामले सार्वजनिक हैं। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा है कि वे पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से काम करें। - राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी रेंज

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