मामला दर्ज करने के बाद से पुलिस की कार्रवाई शुरुआत से ही सवालों के घेरे में रही। पुलिस ने जीवनजोत की गिरफ्तारी में दिलचस्पी नहीं दिखाई। आरोपी खुलेआम घूमता रहा। पुलिस ने उससे सेटिंग कर ली।
सूत्रों के मुताबिक जब पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो वादी पक्ष भी शांत बैठ गया। चर्चा चली कि जीवनजोत के परिजनों ने सफेदपोशों की पंचायत बुलाकर वादी पक्ष से समझौता कर लिया है। पुलिस समेत सफेदपोशों को करीब 40 लाख रुपये बांटने का भी शोर मचा।
जीवनजोत के चालक को बना दिया आरोपी
खुद को नेशनल शूटर बताने जीवनजोत के एक रिश्तेदार ने भी दबाव बनाने में भूमिका निभाई, जो पुलिस अधिकारी हैं। सेटिंग के बाद विवेचक विक्रांत आर्य ने जीवनजोत को क्लीनचिट देकर उसके चालक समरुल्ला को आरोपी बना दिया।
तब शिकायतें करके थक गए वादी मनमोहन ने नए एसएसपी से गुहार लगाई। एसएसपी ने सीओ प्रथम पंकज श्रीवास्तव से जांच कराई तो खेल खुल गया। तब एसएसपी ने विक्रांत आर्य को निलंबित कर दिया।
खेल करने वाले बचेंगे नहीं- एसएसपी
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि इस मामले में वादी ने शिकायत की थी कि विवेचना के दौरान खेल कर दिया गया। इसकी प्रारंभिक जांच में दरोगा का दोष मिला तो उसे निलंबित कर दिया। कानून से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।