राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमक कर खिलाड़ियों ने खेल को बनाया सुरक्षित भविष्य का आधार
बरेली। सेपक टाकरा सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि यह जिले के खिलाड़ियों के लिए सरकारी सेवाओं में प्रवेश का जरिया बन गया है। जिले के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक जीते। साथ ही, खेल कोटे से विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्ति भी प्राप्त की। इनकी सफलता ने जिले के युवा खिलाड़ियों के लिए नया मार्ग प्रशस्त किया है।
सशस्त्र सीमा बल में सेवाएं दे रहीं शिल्पी
सदर कैंट निवासी 29 वर्षीय शिल्पी कुमारी असम में सशस्त्र सीमा बल में सेवाएं दे रही हैं। शिल्पी बताती हैं कि वर्ष 2007 में उन्होंने पहली बार साई स्टेडियम में सेपक टाकरा का खेल देखा था। यह खेल उन्हें नया और चुनौतीपूर्ण लगा। इसी आकर्षण ने उन्हें इस खेल से जोड़ दिया। अब तक वह राष्ट्रीय स्तर की आठ प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर कई पदक जीत चुकीं हैं। खेल में मिली सफलता ने उन्हें एसएसबी में नियुक्ति दिलाई।
लकी ने खेल से संवारा भविष्य
कैंट क्षेत्र के लकी पोस्ट ऑफिस में शॉर्टिंग असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2000 में उन्होंने सेपक टाकरा खेलना शुरू किया। लकी ने बताया कि उन्हें एसएम सीरिया से मार्गदर्शन मिला। उन्होंने लकी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। निरंतर अभ्यास से लकी अब तक 10 राष्ट्रीय और दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। उनके अनुसार सेपक टाकरा ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ एक अच्छी सरकारी नौकरी तक पहुंचाया।
अन्य खेलों से अलग लगा सेपक टाकरा
कैंट निवासी 23 वर्षीय तरुण कुमार वर्तमान में मुंबई में आयकर विभाग में कर सहायक के पद पर नियुक्त हैं। तरुण बताते हैं कि दोस्त के साथ साई स्टेडियम आना-जाना होता था। वहीं उन्होंने सेपक टाकरा का खेल देखा। कठिन प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास के बल पर वह अब तक 14 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक भी जीत चुके हैं। इन उपलब्धियों के चलते उन्हें सरकारी नौकरी मिली। संवाद