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पचास फीसदी कॉलेजों में लैब बदहाल, प्रैक्टिकल के वक्त आएगा इनका ख्याल

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बरेली। फरवरी में प्रस्तावित बोर्ड परीक्षा से पहले दिसंबर में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रैक्टिकल होने हैं। प्रैक्टिकल को लेकर शासन ने भले ही निर्देश जारी किए हों, लेकिन कॉलेजों की स्थिति बेहद खराब है। करीब पचास फीसदी कॉलेजों की प्रयोगशाला में उपकरण पूरे नहीं हैं। कॉलेज प्रैक्टिकल के वक्त ही इनको दुरुस्त करते हैं। अब विभाग को इनकी चिंता सताई तो इनको नोटिस जारी करने की तैयारी है।
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जिले में 412 कॉलेज हैं। सभी कॉलेजों में लैब दुरुस्त होना जरूरी है, लेकिन इनमें अधिकतर की स्थिति बेहद खराब है। पिछले साल ही कई कॉलेजों की शिकायतें आईं थी कि बिना लैब के ही प्रैक्टिकल करा लिए गए। सिर्फ प्राइवेट कॉलेज ही नहीं बल्कि राजकीय और अनुदानित कॉलेजों का भी यही हाल है। डीआईओएस कार्यालय ऐेसे कॉलेजों से रिपोर्ट मांगने की तैयारी में है। इसमें कुछ कॉलेज पहले से ही चिह्नित हैं। प्रभारी डीआईओएस मन भरन राम राजभर का कहना है कि प्रैक्टिकल से पहले सभी कॉलेजों को लैब दुरुस्त करनी होगी। इस बाबत उनको पत्र जारी करेंगे और निरीक्षण कर लैब की स्थिति भी देखी जाएगी। शासन भी इसको लेकर सख्त है।
अब प्रयोगशाला में 28 हजार के उपकरण जरूरी
यूपी बोर्ड की नई मान्यता के लिए अब प्रयोगशाला को लेकर भी नियम कड़े कर दिए गए हैं। पहले 25 हजार के उपकरण रखने होते थे अब 28 हजार के उपकरण रखने होंगे। शासन स्तर पर इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई और जल्द आदेश जारी हो सकता है। बोर्ड ने 2018 से एनसीईआरटी पैटर्न लागू किया है जिसके देखते हुए यह बदलाव हो रहे हैं। नए नियम के अनुसार विज्ञान प्रयोगशाला में अतिरिक्त संसाधन होने जरूरी हैं।
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