बरेली। जिस स्टेडियम में भारत-पाक मैत्री क्रिकेट मैच खेला गया हो, वहां सुविधाओं के अभाव के चलते कोई प्रैक्टिस को भी तैयार नहीं है। खिलाड़ियों को खोजने के लिए पिछले दो माह से स्टेडियम के कोच और अन्य स्टाफ स्कूलों के चक्कर लगा रहे हैं। स्टेडियम का हाल भी किसी से छिपा नहीं है। लिहाजा नए खिलाड़ी नहीं मिल पा रहे हैं। वहीं, जो खिलाड़ी हैं, उनकी प्रैक्टिस सही तरीके से नहीं हो पा रही है।
हॉकी में नेशनल खिलाड़ी देने वाला स्पोर्ट्स स्टेडियम पिछले कई वर्षों से नेशनल खिलाड़ी तो दूर स्टेट लेवल तक में अपनी धाक जमाने वाला कोई खिलाड़ी नहीं निकाल सका। बताया जाता है कि स्टेडियम में लगभग सभी खेलों के कोच तो हैं, लेकिन वे प्रैक्टिस के बजाय अपने कामों में ज्यादा व्यस्त रहते हैं। नाम न छापने की शर्त पर हॉकी की प्रैक्टिस करने पहुंचे एक खिलाड़ी ने बताया कि स्टेडियम में हॉकी की प्रैक्टिस सही ढंग से नहीं हो पा रही है। करीब तीन साल तक प्रैक्टिस करने के बाद भी अब तक उसमें स्टेट खेलने तक का आत्मविश्वास नहीं आ सका है। खिलाड़ी ने बताया कि कोच सिर्फ ड्राइव और रोडी की ही प्रैक्टिस करा रहे हैं। हफ्ते भर में एक बार भी हिटकी प्रैक्टिस नहीं होती, जबकि हॉकी में हिट की प्रैक्टिस बेहद जरूरी है। हिट की ट्रिक आए बिना किसी प्रतियोगिता में भाग लेंगे तो नियमित प्रैक्टिस का अभाव जरूर दिखाई देगा। कमोवेश यही शिकायत प्रत्येक खिलाड़ी की रही।
हिट से विवाद होने का खौफ
कोच मुजाहिद हसन का कहना है कि स्टेडियम में दोपहर तीन बजे से क्रिकेट, फुटबाल, वॉलीबाल, हॉकी और अन्य आउटडोर खेलों की प्रैक्टिस शुरू हो जाती है। बताया कि पहले, हॉकी की हिट की प्रैक्टिस कराने के दौरान गेंद से अन्य खिलाड़ियों के चोटिल होने पर विवाद हो चुका है। इसलिए हिट की प्रैक्टिस हफ्ते में एक दो बार ही हो पाती है। तर्क है कि मल्टीपरपज ग्राउंड होने से अन्य खेलों के खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने से भी मना नहीं किया जा सकता। स्टेडियम में गर्ल्स और ब्वॉयज मिलाकर हॉकी के 45 खिलाड़ी प्रैक्टिस कर रहे हैं।
बरेली कॉलेज: यहां तो झाड़ियों का उगा है जंगल
बरेली कॉलेज के हॉकी ग्राउंड की हालत खस्ताहाल है। यहां न तो खिलाड़ी हैं और न ही कोई कोच। मैदान में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं। कॉलेज लाइब्रेरी के पास बने इस मैदान को देखकर लगता है कि पिछले कई वर्षों से यहां कोई खेल नहीं खेला गया है।
साई स्टेडियम: कम होते जा रहे हॉकी के खिलाड़ी
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद सिंह की स्मृति में कैंट स्थित साई स्टेडियम में हॉकी के खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं होने के बाद भी खिलाड़ियों की तादाद कम हो रही है। हॉकी की पूर्व नेशनल खिलाड़ी और कोच मिथिलेश ने बताया कि एस्ट्रोटर्फ सुविधा से लैस स्टेडियम में महज 14 हॉकी खिलाड़ी ही हैं।
‘मल्टीपरपज मैदान होने के चलते एक साथ सभी खेल होते हैं। भर्ती की तैयारी कर रहे छात्र भी यहीं रनिंग करने आ जाते हैं। जिसकी वजह से प्रैक्टिस प्रभावित होती है। थ्रो या बॉल से चोटिल होने पर विवाद की आशंका के चलते प्रैक्टिस के कु छ तरीके कराना संभव नहीं हो पाता।’
- विजय कुमार, आरएसओ