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महिला के जरिये रिटायर्ड दरोगा कर रहा था सूदखोरी

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बरेली। सदर कोतवाली से दो साल पहले रिटायर दरोगा अशोक कुमार सक्सेना अपने रिश्तेदार से मिलकर सूदखोरी का सिंडीकेट चला रहा था। आड़ के लिए रुपये एक महिला से दिलाए जाते थे ताकि आड़े वक्त उससे शिकायत करा सकें। वर्दी से उसके पुराने रिश्ते की वजह से थर्राए हरिप्रसाद ने कभी उफ तक नहीं की और सितम सहता चला गया।
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बीडीए कॉलोनी निवासी रिटायर्ड दरोगा के रिश्ते के भाई राजीव ने ब्याज पर दिए दो लाख को दो साल में चार लाख बना दिया। हरिप्रसाद पहले अशोका फोम में फर्नीचर बनाने का काम करते थे। दो साल पहले नौकरी छोड़कर सत्यम होटल के पास अपनी दुकान खोली। तभी राजीव से ये रकम उधार ली थी। राजीव और अशोक ने कॉलोनी की एक महिला के जरिये ये रकम दिलाई थी। सुसाइड नोट में उस महिला के नाम का उल्लेख भी किया है। वे ब्याज दर ब्याज लौटाते जा रहे थे। ढाई महीने पहले ज्यादा दबाव बनाया तो उन्होंने बीडीए कॉलोनी का अपना मकान भी राजीव और दरोगा अशोक को दे दिया। इन लोगों ने अपना ताला डाल दिया तो हरिप्रसाद पत्नी के साथ पड़ोस में ही दूसरा मकान लेकर रहने लगे। मकान की रजिस्ट्री नहीं हो सकती थी इसलिए नोटरी शपथपत्र पर लिखापढ़ी कर दी गई।
राजीव ने फिर भी करीब बीस हजार का बकाया निकाला। हरिप्रसाद के बेटे संजय के मुताबिक पिता पर और भी लोगों का कर्ज हो गया था। दुकान नहीं चल पा रही थी तो सप्ताह भर पहले उसे बंद कर दिया। अशोक और राजीव को सबसे ज्यादा परेशानी इसी बात से हुई। उन्हें लगा कि अब हरिप्रसाद से और रुपये नहीं मिल सकेंगे। दो दिन पहले दोनों ही हरिप्रसाद के कमरे पर आए और उससे मारपीट की। हरिप्रसाद ने कहा कि दस-पंद्रह हजार रुपये की बात है तो वह सोफा बनाकर उन्हें दे देगा। बावजूद दोनों धमकाते हुए चले गए कि रुपये ही चाहिए, नहीं मिले तो अंजाम भुगतना पड़ेगा। संजय के मुताबिक तभी से पिता सदमे में थे। उसे कॉल करके कहा था कि बहुत हो गया, अब वो कुछ बड़ा कदम उठाएंगे। उसने पुलिस से शिकायत की सलाह भी दी पर वे चौकी या थाने गए नहीं। वे इतना बड़ा फैसला ले लेंगे ये कभी नहीं सोचा था।
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अलग-अलग रह रहे परिवार के सदस्य
- हरिप्रसाद के पांच बेटे देवेंद्र, संजय, रवि, विजय और अजय व एक बेटी है। बेटी समेत अधिकांश की शादी हो चुकी है। इनमें देवेंद्र और रवि दिल्ली में रहकर काम करते हैं। सबसे छोटा बेटा रुद्रपुर की फैक्ट्री में हाल ही में काम करने गया है और दो बेटे अपने परिवार के साथ शहर में ही अलग स्थानों पर रहते हैं। सभी अपना फर्नीचर का पुश्तैनी काम करते हैं। घटना के बाद परिवार के अधिकांश पुरुष और मोहल्ले के लोग थाने आ गए। इससे वहां काफी भीड़ हो गई। संजय ने बताया कि उन्होंने परिवार की महिलाओं को अभी पिता के साथ हुई घटना की जानकारी नहीं दी है।
ब्याज के बदले मकान लिखाने का खेल
- करगैना बीडीए कॉलोनी में आवंटित मकानों को दूसरे को बेचकर हस्तांतरण करना काफी दिक्कत भरा काम है। हालांकि सौदे के बाद लोग नोटरी शपथपत्र व अन्य तरीके से मकानों की लिखापढ़ी एकदूसरे को कर देते हैं जिसे लेकर बाद में भी विवाद चलते रहते हैं। यहां रहने वाले लोग अधिकांश निम्न या निम्न मध्यमवर्गीय वर्ग से जुड़े हैं। शराब, जुआ, सट्टा जैसे धंधे में भी एक बड़ा वर्ग लिप्त है। इसलिए इनके मकानों पर रसूखदारों और सूदखोरों की नजर रहती है। वे वक्त वे वक्त इन लोगों को उधार देते रहते हैं और बाद में मकान की लिखापढ़ी करा लेते हैं। ऐसे मकानों को बाद में किराये पर उठा दिया जाता है या किसी और को इसी तरह बेच दिया जाता है। एक-एक सूदखोर पर कई-कई मकान हैं।

पुलिस की थ्योरी: कहीं और खाया जहर
- घटना को लेकर अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि हरिप्रसाद ने जहर आखिर कहां खाया। हालांकि वह काफी देर से एसएसपी परिसर में टहल रहे थे। ऐसे में बड़ी संभावना है कि परिसर के ही किसी कोने में जहर खा लिया हो। हालांकि एसपी देहात समेत पुलिस इससे इंकार कर रही है। पुलिस का मानना है कि हरिप्रसाद ने दफ्तर में आने से पहले ही जहर खा लिया था जिसका असर बाद में दिखाई दिया।

रिटायर्ड दरोगा समेत दोनों आरोपी गिरफ्तार
- रिटायर्ड दरोगा अशोक कुमार सक्सेना और राजीव सक्सेना को सुभाष नगर पुलिस ने देर रात उनके घरों से गिरफ्तार करने का दावा किया। इंस्पेक्टर हरिश्चंद्र जोशी का कहना था कि दो ही आरोपी नामजद किए गए थे जिन्हें पकड़ लिया गया है। गुरुवार को इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।
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