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पुलिस की पाठशाला: सावधानी हटी दुर्घटना घटी... नियमों से न करें खिलवाड़; एसपी ट्रैफिक ने पढ़ाया सुरक्षा का पाठ

Mon, 29 Jan 2024 06:44 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली के जनता इंग्लिश इंटर कॉलेज में सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से पुलिस की पाठशाला का आयोजन हुआ। इसमें एसपी ट्रैफिक शिवराज ने विद्यार्थियों से यातायात नियमों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि छोटी चूक से भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इसलिए कभी भी नियमों से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। 
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एसपी ट्रैफिक ने विद्यार्थियों को बताया यातायात नियमों का महत्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सड़क दुर्घटनाओं में हर दो से तीन मिनट में एक व्यक्ति की मृत्यु हो रही है। इन सब में बरेली शहर शीर्ष पर है और देश विश्व में नंबर वन। इसकी वजह केवल लापरवाही है। यानि सावधानी हटी दुर्घटना घटी। सोमवार को जनता इंग्लिश इंटर कॉलेज में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला में, एसपी ट्रैफिक शिवराज ने विद्यार्थियों से यह बातें कहीं। उन्होंने विज्ञान के न्यूटन के गति विषयक नियमों के जरिए यातायात के नियमों के बारे में बताया। 

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उन्होंने कहा न्यूटन के नियम गति के मुताबिक बनाए गए हैं। इन्हीं नियमों की तर्ज पर बने हैं यातायात के नियम। अगर तेज गति से आती हुई गाड़ी में बिना सीट बेल्ट के चलेंगे। तो पहले तो नुकसान यह होगा की बिना सीट बेल्ट के एयर बैग नहीं खुलेंगे। दूसरी बात यह है कि अगर 80 की स्पीड में गाड़ी चल रही है और दुर्घटना के वक्त वह किसी अन्य वाहन से वस्तु से टकराती है तो क्रिया की प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप उतने ही वेग से गाड़ी में बैठे लोगों को नुकसान होगा। ऐसे में कई बार लोग गाड़ी के बाहर भी निकल सकते हैं। इसलिए यातायात के हर नियम को बहुत सोच समझकर बनाया गया है।

गोल्डन ऑवर के बारे में बताया
एसपी ट्रैफिक ने कहा कि दुर्घटना के बाद एक घंटे तक का समय घायल के लिए बहुत कीमती होता है। अगर इस एक घंटे में घायल को अस्पताल तक पहुंचा दिया जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। इस एक घंटे को यातायात मानकों में गोल्डन आवर कहते हैं। ऐसा व्यक्ति जो घायल की मदद करता है उसे संभ्रांत व्यक्ति कहते हैं। प्रशासन की ओर से उसे पुरस्कार भी दिया जाता है। आप से भी अनुरोध है कि संभ्रांत बनें। दुर्घटना के बाद किसी की मदद जरूर करनी चाहिए।
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छोटी चूक से हो सकती है बड़ी दुर्घटना 
सड़क नियमों में यह माना जाता है कि छोटी चूक से भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। एक व्यक्ति को सड़क पर चलते वक्त महज दो सेकेंड का समय लगता है निर्णय लेने में। 18 साल से कम उम्र के लोगों में यह निर्णयन क्षमता कम होती है इसलिए उन्हें लाइसेंस के लिए पात्र नहीं माना जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान
- हेलमेट पहनकर ही दोपहिया वाहन चलाएं।
- फोर व्हीलर में सीट बेल्ट पहनकर चलें।
- बिना लाइसेंस के गाड़ी न चलाएं।
- सड़क पर चलते समय जागरूक रहें।

 इस मौके पर विद्यालय के प्रबंधक निदेशक काशिफ रजा, प्रधानाचार्य जैनब, दीपशिखा सिंह, शिवम कुमार, जितेंद्र कश्यप समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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