बरेली। बिथरी में सपा से बिजेंद्र सिंह को ब्लाक प्रमुख बनवाने के लिए जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव ने एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया। एक-एक वोट को मैनेज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आखिर तक चले रोमांचक मुकाबले में सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल बसपा विधायक वीरेंद्र सिंह से प्रतिष्ठा की जंग हार गए।
बिथरी चैनपुर में ब्लाक प्रमुख का चुनाव बसपा विधायक वीरेंद्र सिंह और सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव के लिए प्रतिष्ठापूर्ण बन गया था। सपा जिलाध्यक्ष ने बिथरी से विधायक वीरेंद्र सिंह के भाई देवेंद्र सिंह को तीसरी बार चुनाव न जीतने देने के लिए पूरी बिसात बिछा दी। सपा में ब्लाक प्रमुख के टिकट पर संदेश कनौजिया को मनाकर बिजेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनवाया। बीडीसी के एक-एक वोट को मैनेज किया। चुनाव की पूर्व संध्या तक दोनों प्रत्याशियों पर 56-56 वोट होने के दावे किए गए थे। ऐन वक्त पर सपा का एक वोट बसपा में जाने से सपा प्रत्याशी के 55 वोट रह गए और बसपा प्रत्याशी को 57 वोट मिल गए। इस तरह बसपा विधायक वीरेंद्र सिंह अपने भाई देवेंद्र सिंह को वीरपाल से प्रतिष्ठा की जंग में दो वोट से चुनाव जिता ले गए। इससे पहले दो बीडीसी मेंबरों पर गोकशी और 420 धाराओं में एफआईआर भी हुई ताकि ये वोट न डाल सकें। मगर इनके वोट भी पड़ गए जिससे सपा की रणनीति को झटका लगा। नतीजा सपा प्रत्याशी की हार के रूप में सामने आया।
वोटर ने हेल्पर पति को भगा दिया
वार्ड 49 से बीडीसी मेंबर राममूर्ति देवी बसपा की वोटर थीं। इनके पति कालीचरन सपा के खेमे में चले गए। पति ने सपा प्रत्याशी बिजेंद्र सिंह को वोट दिलाने की गारंटी ले ली। वह बिथरी में मतदान स्थल पर सुबह से आकर डट गए। सपा ने पति को हेल्पर के रूप में वोट डालने के लिए तैनात कर दिया। राममूर्ति देवी बसपा समर्थक एक महिला के साथ वोट डालने आईं तो हेल्पर पति भी अपनी पत्नी के पीछे हो लिए। गेट पर पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोका तो वह बोले कि पत्नी बिना पढ़ी हैं। वह हेल्पर के रूप में वोट डालने अंदर जाएंगे। चूंकि कालीचरन सपा समर्थक थे तो पुलिस कर्मियों ने उन्हें पत्नी के साथ अंदर जाने दिया। मतदान स्थल पर जब महिला से हेल्पर की जरूरत के बारे में पूछा गया तो राममूर्ति देवी ने अपने पति को पहचानने से ही इनकार कर दिया। बोलीं- हम नहीं जानतें कि ये कौन हैं। हमें हेल्पर की जरूरत नहीं है। अपना वोट खुद डालेंगे। पति कालीचरन झल्लाते हुए गेट से बाहर निकल आए। थोड़ी देर बाद पत्नी भी बाहर निकल आईं। दोनों झगड़ते हुए बैरियर के बाहर चले गए। उधर से लौटे लोगों ने बताया कि बाहर पहुंचकर पत्नी और पत्नी में वोट डालने को झगड़ा बढ़ गया तो पत्नी ने हेल्पर पति को चांटे भी जड़ दिए।
चुनाव से पहले दोनों प्रत्याशियों पर 56-56 वोट थे। हमारा एक वोट ऐन वक्त पर बसपा में चला गया। दो वोटरों पर एफआईआर थी। उनका वोट नहीं पड़ना था लेकिन प्रशासन ने दोनों के वोट डलवा दिए। अगर वे दो वोट नहीं पड़ते और एक वोट बसपा में नहीं जाता तो सपा प्रत्याशी ही चुनाव जीतता। फिर भी बिजेंद्र बहुत बहादुर है। उसने विधायक के भाई को टक्कर दी। धनबल के आगे जनबल हार गया।
- वीरपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा
समाजवादी पार्टी की सरकार में प्रशासन ने उतनी अच्छीभूमिका निभाई जितनी कि वह निभा सकता था। मैं अगर चुनाव जीता हूं तो गरीबों की दुआओं और ईश्वर की कृपा से। बिथरी के चुनाव को बहुत हाईप दे दी गई। मैं चुनाव जीत चुका हैं इसलिए मुझे किसी के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करनी।
-देवेंद्र सिंह, विजयी प्रत्याशी बसपा