बरेली सीट पर भाजपा के संतोष गंगवार आठ बार जीत हासिल कर चुके हैं। उनके सामने सपा कोई कुर्मी बिरादरी से ही प्रत्याशी लाना चाह रही है, चर्चा है कि यहां बाहरी प्रत्याशी ही होगा। वहीं पीलीभीत में भाजपा से टिकट घोषणा के बाद यह भी संभव है कि सपा इस सीट पर खुद का प्रत्याशी न उतारकर इंडिया गठबंधन के ही एक प्रत्याशी को समर्थन दे दे।
एक साल पहले लखनऊ में हुई बैठक में जब पीलीभीत सीट की चर्चा आई तो सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सभी के सामने ही एक सांसद का नाम लेते हुए कहा था उन्हें चुनाव नहीं लड़ाना है क्या। माना जा रहा है कि पीलीभीत में पार्टी इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के समर्थन में रहेगी। इन्हीं समीकरणों के आसपास चीजें रहीं और मौजूदा घोषित टिकटों में कोई बदलाव नहीं हुआ तो इस बार के चुनाव में सपा के पास कोई भी स्थानीय प्रत्याशी नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर विरोध, जिलाध्यक्ष बदलने की मांग
सपा की दूसरी सूची जारी होते ही सोशल मीडिया पर भी विरोध शुरू हो गया है। कार्यकर्ता लिख रहे हैं कि पूर्व में भी कुछ बाहरी नेताओं को लड़ाया गया, लेकिन वह फिर कभी क्षेत्र में लौटकर नहीं आए। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि विरोध तो अंदरखाने शुरू हो गया है लेकिन पार्टी छोड़कर कोई कहीं नहीं जाएगा, यह बहुत साफ है।
पार्टी नेता यही आस लगा रहे हैं कि उनके विरोध और तर्कों के बाद शायद पार्टी टिकट बदल दे। यादव नेताओं ने यह भी मांग उठानी शुरू कर दी है कि जब आंवला से मौर्य प्रत्याशी घोषित हो गया है तो जिलाध्यक्ष के पद पर अब यादव होना चाहिए ताकि यादव एकजुट रहें।