कश्मीर के उड़ी सेक्टर में सेना के बेस कैंप पर आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तल्खी ने पाकिस्तानियों में घबराहट बढ़ा दी है। यहां रिश्तेदारों के यहां आए पाकिस्तानी तय समय से पहले वापस जा रहे हैं, उनका मानना है कि मीडिया के माध्यम से मिल रही खबरों ने बेचैन कर दिया है।
करांची से आए शकील और उनकी मां फरहा पांच दिन पहले भारत आए थे। चार दिन तक चंदौसी में जामा मस्जिद के निकट अपने चाचा के यहां रहे। वहां रह रहे श्तिेदारों के बीच रहे, शुक्रवार को दोपहर में बरेली में बाग अहमद अली तालाब मोहल्ला में अपने दूसरे चाचा सलीम के यहां आए। यहां पर उन्हें पूरे 25 दिन रहना था लेकिन अब तय समय से पहले ही पाकिस्तान लौट जाएंगे। कह रहे हैं ऐसे हालात में और ज्यादा समय तक रहना समझ में नहीं आ रहा है।
बरेली आए दो अन्य व्यक्ति भी समय से पहले पाकिस्तान जाने की तैयारी में हैं। इनमें से एक व्यक्ति करांची तो दूसरे लाहौर से बरेली आए हैं। जो कि 30 सितंबर से पहले पाकिस्तान लौट जाएंगे। करांची में जेनरेटर मेकेनिक शकील का कहना है कि उनको भारत में कोई परेशानी नहीं है। पाकिस्तान से बेहतर माहौल है। यहां किसी के बीच कोई गलतफहमी नहीं है लेकिन मीडिया के जरिए ही दोनों देशों के बीच तल्खी दिखाई दे रही है। शकील कहते हैं कि वह 1991 में एक महीने का बीजा पर बरेली आए थे। इस बार एक महीने तक बरेली और चंदौसी में रहने का बीजा मिल गया था।
कॉल बढ़ीं मगर अब नहीं होती लंबी बात
तीन दिन से भारत और पाकिस्तान के बीच मोबाइल और लेंड लाइन से बहुत छोटी काल हो रही हैं। बीएसएनएल के महाप्रबंधक इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि यहां से कराची, इस्लामाबाद, हैदराबाद, लाहौर, पेशावर आदि शहरों के लिए काल की संख्या तो बढ़ गईं हैं लेकिन इन काल की अवधि के हो गई हैं। पाकिस्तान काल करने वालों का कहना है कि एक दूसरे देश की हुकूमत के बीत तल्खी के कारण हर काल टेप हो रही है। ऐसे में घर परिवार की बात करें और उसका खुफिया एजेंसियों ने अलग अर्थ निकाला तो मुश्किलें बढ़ जाएंगी। इसलिए मोबाइल पर सावधानी से कम समय के लिए बात की जा रहीं हैं।
कम आ रहे हैं पाकिस्तानी
बरेली। भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में पड़ी दरार के कारण पाकिस्तान से बरेली आने वालों की संख्या में कमी आ रही है। इस साल सितंबर तक मात्र 19 पाकिस्तानी ही बरेली में अपने रिश्तेदारों के यहां आए हैं। जो कि अब तक की सबसे कम संख्या है। पिछले साल 2015 में 32 पाकिस्तानी ही बरेली में आए थे। 2014 में इनकी संख्या 39, 2013 में 45 और 2012 में 57 थी।