बुजुर्ग दंपती के श्रवण कुमार बेटों के साथ उनकी पत्नियां और नातियों के साथ कुछेक रिश्तेदार भी कांवड़ यात्रा के साक्षी बनने को साथ चल रहे हैं। नाती राहुल, सोहित, मोहित और अभि भी अपने बाबा- दादी की सेवा में साथ हैं।
राहगीरों में जिरौली निवासी संजीव कुमार ने बताया कि ऐसा बहुत कम ही नजर आता है। आसान भी नहीं होता कि कोई इस तरह बैठाकर करीब 80 किलोमीटर तक आस्था का सफर पूरा कर पाए। लोग यह कहते हुए भी आगे बढ़ गए कि धन्य है ऐसे माता- पिता, जिन्हें श्रवण कुमार जैसे बेटे मिले हैं।