जिस लाइन पर ट्रेन चलाई उसी पर हुई मौत
बेटे आलोक ने बताया कि पिता चंद्रिका यादव ने लोको पायलट रहते इज्जतनगर और काठगोदाम के बीच कई साल ट्रेन चलाई थी। अब उसी लाइन पर ट्रेन की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई।
केशव के पिता मंशालाल भी रेलवे से सेवानिवृत्त हैं। मंशालाल ने बताया कि वह घर से दूर गिरधारीपुर में अकेले किराये पर रहते हैं। फोन भी नहीं रखते। इसलिए परिवार से ज्यादा संपर्क नहीं रहता। इधर, चंद्रिका यादव के पुत्र शैलेश यादव की भी पांच साल पहले बरेली जंक्शन पर ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
एक परिवार में खुशी, दूसरे में छाया मातम
शिनाख्त के कारण पहले केशव के परिवार में मातम छा गया। अगले दिन मंशालाल जीवित घर पहुंचे तो खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं, जब चंद्रिका यादव की मौत और अंतिम संस्कार होने की सूचना उनके परिजन को मिली तो उनके घर में मातम पसर गया।