आठवीं वाहिनी पीएसी के शिविरपाल रामनाथ राणा ने कैंट थाना पुलिस को बताया कि महिला कुक चंद्रा देवी की 27 फरवरी को तबीयत खराब होने पर जिला अस्पताल भेजा गया था। वहां डॉक्टरों ने चंद्रा देवी के पुत्र प्रहलाद सिंह मेहर को परामर्श दिया कि उन्हें किसी बड़े अस्पताल ले जाएं। प्रहलाद अपनी मां को भोजीपुरा के निजी मेडिकल कॉलेज ले गया। वहां से चंद्रा देवी को एसपीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया। चंद्रा देवी को वहां आईसीयू में भर्ती करा दिया गया। 28 फरवरी को प्रभारी दल नायक चिरांशु कुमार की मौजूदगी में प्रहलाद ने शाम 5 बजकर 33 मिनट पर मां चंद्रा देवी को जीवित अवस्था में डिस्चार्ज कराकर डिस्चार्ज स्लिप भी प्राप्त कर ली।
आरोप है कि चंद्रा देवी का जो मृत्यु प्रमाण पत्र बेटे प्रहलाद ने विभाग में जमा कराया गया है उसके अनुसार चंद्रा देवी की मृत्यु 28 फरवरी की सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर हुई है। जीवित डिस्चार्ज कराने से करीब 12 घंटे पहले ही प्रहलाद ने मां की मौत का प्रमाणपत्र दिया जिससे बेटे की भूमिका संदिग्ध हो गई। कैंट थाना पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर जांच में जुट गई है।
गाय चोरी का सदमा बताकर प्रचारित किया
रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले ही चंद्रा देवी गंभीर बीमार पड़ गईं। तब उनके बेटे और बहू ने प्रचारित किया कि चंद्रा देवी जिस गाय को पालती थीं, वह चरने के लिए गई तो लौटी नहीं। परिवार ने बताया कि गाय की चोरी के बाद से चंद्रा देवी ने खाना पीना छोड़ दिया है। कुछ समय उनका घर पर ही इलाज कराया और फिर सरकारी अस्पताल में दिखवाया। पीजीआई से अचानक डिस्चार्ज कराने की भी स्पष्ट वजह नहीं बताई। चर्चा है कि मृतक आश्रित की नौकरी पाने के लिए चंद्रा देवी की जान अपनों ने ही ले ली। पुलिस को इसी सच से पर्दा उठाना है।