महिलाओं को वोट का अधिकार बहुत लंबी लड़ाई के बाद विश्व के हर देश में मिला पर इस अधिकार का इस्तेमाल महिलाएं अपने विकास और सशक्तिकरण में बहुत कम ही कर पाती हैं। नगरीय निकाय चुनाव में भी शहर की महिला वोटर की यही तस्वीर दिखी। जिस प्रत्याशी को वोट दे रहीं हैं, उसमें क्या क्षमताएं हैं ? इस सवाल पर कई महिलाओं ने जवाब दिया कि वे घर में रहती हैं, प्रत्याशियों के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता, घरवालों ने जिसके नाम पर बटन दबाने को कहा है वे तो उसे ही चुनेंगी।
हालांकि वर्किंग क्लास और पढ़ी लिखी महिलाओं ने प्रत्याशियों के बारे में अपनी राय बताई, नाम गोपनीय रखते हुए भी उन्होंने अपने वोट के पीछे के तर्क को बताया। पर इस वर्ग में भी ज्यादातर महिलाएं ऐसी थीं जिन्होंने ऐसे प्रत्याशी को ही वोट देने की बात कही जिस पार्टी को उनका परिवार वर्षों से लड़ाता आ रहा है। महिलाओं का भी यही हाल दिखा।
दोपहर बाद पोलिंग बूथ पर ज्यादा आईं महिलाएं
महिला वोटर की पोलिंग बूथ पहुंचने की संख्या में दोपहर 12 बजे के बाद बढ़त होना शुरू हुई। घर में काम निपटाने के बाद महिलाएं बूथ पर पहुंचने लगीं, यह सिलसिला अपराह्न तीन बजे तक चला। हालांकि चौपुला के पास नैना हाउसिंग कालोनी की तीन पड़ोसन अंजलि, कल्पना और पुष्पा सुबह दस बजे वोट देकर लौटती मिलीं। बोलीं, छुट्टी का दिन है, दिनभर काम चलते रहेंगे इसलिए सबसे पहले वह वोट देने चली आईं।