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जिंदा हूं मैं : छह साल से जीवित होने के सुबूत लेकर भटक रहीं सुरसती, अफसरों को यकीन ही नहीं

Sun, 09 Apr 2023 02:15 PM IST
मुकेश कुमार अनूप शुक्ला, संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग महिला खुद को जीवित साबित करने के लिए सुबूत लेकर भटक रही हैं, लेकिन सरकारी कागजों में उसे मृत घोषित कर दिया गया है। 
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सुरसती देवी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीलीभीत में समाज कल्याण विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विभाग ने सत्यापन में साल 2017 में एक वृद्धा को मृत दर्शाते हुए उसकी पेंशन को बंद कर दिया। तब से महिला खुद के जिंदा होने का प्रमाण लेकर भटक रही है, लेकिन अफसर यकीन ही नहीं कर रहे। मृत घोषित होने के कारण बैंक में खाते में जमा उसके रुपये भी नहीं निकल पा रहे हैं। समाज कल्याण विभाग ने वृद्धा को मृत बताते हुए खाता बंद करने का पत्र बैंक को भेज दिया है।

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सरकार की ओर से वृद्धजनों को पेंशन की सौगात दी जाती है, ताकि वह अपना भरण पोषण कर सके। पेंशन के लिए हर साल इसका सत्यापन भी होता है, ताकि अपात्र और मृतकों की स्थिति स्पष्ट हो सके। इस सत्यापन में समाज कल्याण विभाग ने बड़ी चूक कर दी थी। वर्ष 2017 में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार ने सत्यापन की रिपोर्ट पर पूरनपुर क्षेत्र के गांव लकुटिहाई की सुरसती देवी को मृत घोषित कर दिया था। 

सुरसती देवी के खाते में भेजी गई धनराशि को भी वापस सरकार के खजाने में भेजने के लिए पत्र जारी कर दिया गया। बैंक को भेजे गए पत्र में कहा गया था कि सत्यापन के दौरान महिला मृत होने की बात सामने आई है। लिहाजा उनकी पेंशन आहरण न की जाए। 

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गन्ने का भुगतान भी रुका 

समाज कल्याण विभाग की रिपोर्ट के बाद उनका खाता बंद कर दिया। तब से आज तक महिला खुद को जिंदा होने का प्रमाण देती भटक रही है, लेकिन अभी तक उसकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी। महिला का कहना है कि मृत घोषित होने से उसके बैंक खाते में पड़े गन्ना का भुगतान भी नहीं मिल पा रहा है। यही नहीं किसान सम्मान निधि भी बंद हो गई है।

क्या बोली पीड़ित महिला

सुरसती देवी ने बताया कि उनको मृत घोषित कर दिया गया था। जब पेंशन नहीं आई तो बैंक गईं। वहां बताया गया कि समाज कल्याण विभाग से खाते पर रोक लगा दी गई है। इस पर कई बार पूरनपुर बीडीओ के यहां गई। कागज भी दिए। इसके बाद भी काम नहीं हुआ। विकास भवन के भी काफी चक्कर काटे। किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। अब दफ्तरों के चक्कर काटते काटते थक गई हूं। पेंशन न आए लेकिन उसका खाता तो खुलवा दिया जाए, गन्ने के भुगतान के रुपये खाते में पड़े हैं, उसे निकालना है।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी विपिन वर्मा ने बताया कि मामला 2017 का है और इसकी उनको जानकारी नहीं है। इसे दिखवाया जा रहा है। कार्यालय के कर्मियों ने बताया कि महिला अभी तक उनके पास नहीं आई है। सोमवार को कार्यालय खुलने के बाद नियमानुसार पात्र महिला की पेंशन को चालू करवाया जाएगा।
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