फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिवाली 2026: पटाखों का धुआं हो सकता है खतरनाक, बच्चे-बुजुर्ग और सांस के मरीज बरतें सावधानी

Sun, 08 Nov 2026 08:49 AM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

दिवाली पर पटाखों से निकलने वाला धुआं बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, अस्थमा और हृदय रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है। चिकित्सकों ने धुएं से दूर रहने, घर के अंदर रहने और जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है। 
विज्ञापन
पटाखों का धुआं हो सकता है खतरनाक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिवाली पर आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं सेहत के लिए परेशानी की वजह बन सकता है। पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म कण और जहरीली गैसें सांस के जरिये शरीर में पहुंचकर फेफड़ों और हृदय पर असर डाल सकती हैं। सबसे अधिक खतरा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, अस्थमा और हृदय रोगियों को रहता है। चिकित्सकों ने ऐसे लोगों को पटाखों के धुएं से दूर रहने की सलाह दी है।

विज्ञापन
Trending Videos

बरेली के जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एएम अग्रवाल के मुताबिक, पटाखों का धुआं सांस की नलियों में जलन और सूजन पैदा कर सकता है। अस्थमा और सांस के पुराने रोगियों को सांस लेने में परेशानी, घरघराहट और खांसी की शिकायत हो सकती है। गर्भवतियों को भी पटाखों से बचना चाहिए। नवजात शिशु को धुएं से बचाएं, क्योंकि इनके फेफड़े विकसित न होने से प्रभावित होते हैं।

ये उपाय अपनाएं
पटाखों का धुआं अधिक होने पर घर के अंदर रहें और दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें। बाहर निकलना हो तो मास्क या रुमाल से मुंह ढकें। अस्थमा के मरीज इन्हेलर साथ रखें। बच्चों, बुजुर्गों को आतिशबाजी की जगह से दूर रखें। आंखों में जलन होने पर साफ पानी से धोएं। रगड़ने से बचें। गले में खराश होने पर गुनगुना पानी पीने और गरारे करने से राहत मिल सकती है। नाक में जलन होने पर सामान्य सलाइन नेजल स्प्रे का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, ये उपाय सिर्फ हल्की परेशानी में राहत दे सकते हैं। धुएं से बचाव का विकल्प नहीं हैं।
विज्ञापन

जलने पर 20 मिनट तक ठंडे पानी से धोएं
पटाखे से जलने पर प्रभावित हिस्से को कम से कम 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी के नीचे रखें। जले स्थान पर टूथपेस्ट, घी, तेल, हल्दी, बर्फ न लगाएं। फफोलों को न फोड़ें। साफ कपड़े या ना चिपकने वाली पट्टी से ढकें। इसके बाद अस्पताल पहुंचें। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, तेज घरघराहट या लगातार खांसी होने पर भी घरेलू उपचार के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें। गंभीर स्थिति में 102 और 108 एंबुलेंस को कॉल करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें