सेटेलाइट से बीसलपुर रोड
जल निगम की ओर से सीवर लाइन डालने का कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य से धूल न उड़े, इसके लिए पानी का छिड़काव नहीं हो रहा था। धूल से आम जनमानस प्रभावित न हो इसके रोकथाम के भी इंतजाम नहीं थे।
सुभाषनगर करगैना रोड
पीडब्ल्यूडी की ओर से चौपुला से बदायूं जाने वाले मार्ग का निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से हो रहा है। करीब छह माह से बजरी, पत्थर पड़े हैं। धूल का गुबार के बीच से गुजरना पड़ रहा है। यहां भी मानकों की अनदेखी दिखी।
कुतुबखाना पुल निर्माण
कोतवाली से कोहाड़ापीर तक निर्माणाधीन फ्लाईओवर के निर्माण कार्य के चलते क्षेत्र में धूल का गुबार मंडरा रहा है। यहां पुल के ऊपर और नीचे सर्विस लेन बन रही है। यहां भी पानी का छिड़काव और ग्रीन वॉल नहीं लगी।
आंख में जलन और सांस लेने में दिक्कत
फिजिशियन डॉ. पवन कपाही के मुताबिक नम वातावरण से धूल और धुएं के कण वातावरण में ऊपर नहीं जा पाते। धूल की परत निचली होने से सीधे इंसान के संपर्क में आते हैं। शहर में धुंध बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक है। लंबे समय तक धुंध में रहने से सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन होती है। साथ ही त्वचा रोग होने की आशंका बढ़ती है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शनिवार को शहर का एक्यूआई यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक 126 दर्ज हुआ। राजेंद्र नगर का 121 और सिविल लाइंस का एक्यूआई 130 दर्ज हुआ। दो दिन पहले राजेंद्र नगर का 111 और सिविल लाइंस का 237 दर्ज हुआ था। प्रदूषण करीब सप्ताह भर से हर दिन सौ के पार दर्ज हो रहा है। जो सामान्य से ज्यादा है।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी रोहित सिंह ने बताया कि यह प्रदूषण नहीं बल्कि सर्दी के मौसम की धुंध है। धूल और वाहनों के धुएं से एक्यूआई सामान्य से ज्यादा है। रोकथाम के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजा है।
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम विशेषज्ञ अतुल कुमार ने बताया कि शहर में प्रदूषण की परत छाई है। न्यूनतम पारा गिरने से धूल और धुआं के करण ऊपर नहीं जा पा रहे हैं। धुंध छाने से लोगों को परेशानी होगी।