सेब, टमाटर, आलू व मक्का पर किया जा चुका शोध, एआई इंटेलिजेंस से कृषि क्षेत्र मेें आएगा बदलाव
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग ने आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में कर दिखाया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि इस शोध से कृषि के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है। इससे किसानों को फसल में लगने वाले रोगों के इलाज के लिए वैज्ञानिकों के पास दौड़ कर नहीं जाना होगा। फोन पर एक फोटो अपलोड करते ही फसल की पत्तियों पर नजर आने वाले लक्षणों को देखकर उसका इलाज जान सकेंगे। इसके लिए किसान को केवल स्मार्ट फोन की आवश्यकता होगी।
रुविवि के सीएसआईटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. ब्रजेश कुमार व उनके निर्देशन में रिसर्च कर रही पीएचडी छात्रा प्रियंका प्रधान ने इस शोध को अंजाम दिया है। इसे पूरा करने में करीब दो वर्ष का समय लगा है। इसे बीते वर्ष जर्मनी के द जर्नल्स ऑफ प्लांट डिजीज एंड प्रोडक्शन में भी जगह मिल चुकी है। डॉ. ब्रजेश ने बताया कि ये शोध किसानों को आसानी से फसल की बीमारी, बीमारी का कारण और उसका इलाज बताएगा। ये परीक्षण अब तक आलू, टमाटर, सेब और मक्के की फसलों पर किया गया है। इसमें स्मार्ट फोन के माध्यम से इन फसलों की कई फोटो खींची गईं। इसके बाद एआई के माध्यम से इमेज की फीचर मैपिंग यानी एडवांस स्कैनिंग की गई। इसमें एक स्वस्थ फसल की पत्तियों और खराब फसल की पत्तियों की जांच की जाती है। इस पर नजर आने वाले लक्षणों से बीमारी का पता चल जाता है। इससे किसान अपने फसल में लगने वाले रोगों का इलाज एआई के माध्यम से पा सकेंगे। डॉ. ब्रजेश ने बताया कि अभी एप पर काम जारी है। कृषि वैज्ञानिकों की सहायता से फसलों की बीमारियों के आधुनिक उपायों पर कार्य किया जा रहा है। संवाद