सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए फरीदपुर में जमीन मिलने से अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को और मजबूती मिलने के आसार है। अभी तक प्रोजेक्ट में इस बात का जिक्र था कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बरेली के पास है लेकिन वह चलता नहीं है। जमीन मिलने के बाद इसे शिफ्ट करने का काम तेजी से शुरू कर दिया जाएगा, जिससे कूड़ा निस्तारण की समस्या खत्म हो जाएगी और फिर शहर इसके जरिए अतिरिक्त नंबर जुटा सकेगा।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का न चलना भी नकारात्मक प्रभाव छोड़ रहा था। दरअसल, स्मार्ट सिटी में शहर को सिर्फ साफ, सुंदर और सुविधाओं से युक्त ही नहीं किया जाना है बल्कि कूड़े और सीवर का निस्तारण कैसे करते हैं, इस पर भी जोर देना है। सीवर की समस्या से निजात के लिए अमृत योजना के तहत 2500 करोड़ के प्रस्तावित काम पूरे हो गए, जबकि कूड़ा निस्तारण का कोई ठोस उपाय निगम के पास नहीं था। इसी के तहत कई गांवों में जमीन ढूंढने के बाद आखिरकार फरीदपुर में नगर निगम को कूड़ा निस्तारण के लिए जगह मिल गई है। अभी सौ बीघा जमीन की रजिस्ट्री निगम की ओर से कराई गई है। करीब 35 किसानों की रजामंदी से हुई रजिस्ट्री को निगम ने शुक्रवार रात फाइनल किया था। निगम 300 बीघा और जमीन फाइनल करके यहां प्लांट शिफ्ट कर देगा। बता दें कि 16 अक्तूबर को लखनऊ में प्रोजेक्ट का अंतिम प्रेजेंटेशन है। इसके बाद इसे मंत्रालय में जमा किया जाएगा।
स्वच्छता सर्वेक्षण में भी मिलेंगे नंबर
पिछले साल हुए स्वच्छता सर्वेक्षण में बरेली को 298वीं रैंक मिली थी। उस समय केंद्र सरकार की ओर से आई टीम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट न होने पर बरेली के नंबर काट लिए थे। इस बार जमीन मिल गई है तो पूरे अंक न सही लेकिन कुछ नंबर जरूर मिल जाएंगे।
कोट
कूड़ा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू करना बहुत जरूरी है। इससे आगे और भी कई प्रोजेक्ट शुरू हो पाएंगे। निगम को राजस्व देने का भी यह जरिया बनेगा। इससे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को मजबूती मिलेगी।
आरके श्रीवास्तव, नगर आयुक्त
300 बीघा जमीन की और होंगे बैनामे
फरीदपुर। शुक्रवार को आधी रात तक नगर निगम के पक्ष में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने को नौ बैनामे हो पाए। करीब आधा दर्जन और बैनामे होने हैं। ये अब सोमवार को होंगे। इसी इलाके में 300 बीघा जमीन के बैनामे और होने हैं। फरीदपुर की इस जमीन को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन विभाग, सिंचाई विभाग और एयरफोर्स से जमीन को मौखिक एनओसी मिल चुकी है। बताया जा रहा है कि नगर निगम के नाम जिस जमीन का बैनामा हुआ है, वह ऊसर भूमि है। इस पर खेती आदि कम होती है।