स्मार्ट सिटी की सूची में बरेली को शामिल करने के लिए एक बार फिर स्थानीय प्रशासन ने कमर कस ली है। 16 अक्तूबर को लखनऊ में होने जा रही बैठक में प्रजेंटेशन से पहले शुक्रवार को इस प्रोजेक्ट पर यहां आखिरी बार मंथन किया गया। बैठक में बरेली में एक सरकारी फैशन इंस्टीट्यूट स्थापित करने के अलावा अतिक्रमण मुक्त शहर बनाने के लिए पोर्टेबल दुकानों की योजना पर अगले महीने क्रियान्वयन का निर्णय लिया गया। बैठक में बताया गया कि बरेली का प्रोजेक्ट तैयार करने में इस बार इंदौर और राजस्थान को स्मार्ट सिटी बनाने वाली एजेंसी का भी सहयोग लिया जा रहा है।
डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दारा शॉ एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने सुझाव रखे। एजेंसी के कंसलटेंसी डिवीजन के वाइस प्रेसीडेंट विवेकानंद शर्मा और विवेक ने डीएम को बताया कि प्रोजेक्ट में शहर की मजबूती, उसकी कमजोरी, अवसर और सुधार के बिंदुओं पर काम किया गया है। विवेकानंद शर्मा ने बताया कि स्मार्ट सिटी बनने से भले ही 1700 करोड़ रुपये शहर को मिल जाएं लेकिन इसके साथ यह भी देखना जरूरी है कि शहर में सुविधाआें को बढ़ाने के लिए हमारे पास कितना राजस्व है। इसके लिए जरी के अलावा कुछ और भी कामों को शामिल किए जाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि एक मोबाइल ऐप ‘मेरी बरेली’ भी बनाया जाएगा। 16 अक्तूबर को लखनऊ में प्रजेंटेशन के बाद प्रोजेक्ट केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में जमा होगा।
बैठक में डीएम ने कहा कि बरेली में काफी जरी कारीगर पंजीकृत हो चुके हैं। 16 अक्तूबर से पहले बाकी कारीगराें को भी इसमें पंजीकृ त किया जाएगा। बैठक में अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति सिंह, मुख्य अभियंता एसके अंबेडकर, एसपी ट्रैफिक कमलेश बहादुर, जिला उद्योग केंद्र के जीएम अनुज कुमार, उद्यमी अजय शुक्ला, शकील कु रैशी और आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना ने भी अपने विचार रखे।
अनुपम ने दिया फैशन इंस्टीट्यूट खोलने का सुझाव
आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना ने कहा कि बरेली में सरकारी फैशन इंस्टीट्यूट होना बहुत आवश्यक है। डीएम ने पूछा कि क्या एक एकड़ जमीन इसके लिए सही होगी तो सभी ने सहमति जताई। डीएम ने कहा कि बरेली सेंट्रल में इस प्रोजेक्ट को भी शामिल किया जा सकता है। अनुपम सक्सेना ने अहिच्छत्र और आला हजरत आने वाले श्रद्धालुआें को भी इसमें जोड़ने का सुझाव दिया।