बरेली। हाल ही में शहर के लोगों को बगैर कोई पूर्व सूचना दिए 15 करोड़ के चालान कटवा देने वाले स्मार्ट सिटी के अफसरों को सड़कों की हालत से कोई लेना-देना नहीं है। सारी जोड़तोड़ इस बात की है कि जनता को कोई सहूलियत मिले न मिले, स्मार्ट सिटी की रैंकिंग ठीकठाक रहे। नतीजा यह है कि शहर की पब्लिक कई सड़कों पर सालों से ठोकरें खा रही है, फिर भी उन सड़कों की मरम्मत तक नहीं कराई जा रही है।
स्मार्ट सिटी के अफसर फिलहाल इसी बात पर खुश हैं कि बरेली की रैंकिंग 35वें नंबर से 17वें नंबर पर आ गई है, यह अलग बात है कि रैंकिंग में इस बढ़त का पब्लिक की सुविधाओं से कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल रैंकिंग निर्माण कार्य शुरू होने से बढ़ती है, कौन सा निर्माण कबसे लटका हुआ है, इससे उस पर शायद कोई फर्क नहीं पड़ता। यही वजह है कि कई सड़कें पहले से बुरी तरह ऊबड़-खाबड़ हैं। कुछ सड़कें जो लाखों की लागत से हाल ही में बनाई गईं, वह भी उख़ड़ गईं। मगर रैंकिंग फिर भी बढ़ गई।
स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं का समय से निर्माण न होने की वजह से शहर के लोग कई सालों से मुश्किलें झेल रहे हैं। जिन सड़कों पर निर्माण अधूरे पड़े हैं, उनसे गरमी का मौसम शुरू होते ही तेज हवाओं से धूल के बवंडर उठने लगे हैं। निर्माण सामग्री सड़कों पर फैली हुई है। श्यामगंज से मालियों की पुलिया तक बन रहे डिवाइडर का निर्माण पिछले महीने शुरू होने के बाद इतनी धीमी रफ्तार से चल रहा है कि दस फीसदी भी नहीं हो पाया है। इसकी वजह से सड़क पर बजरी फैली हुई है, जिस पर वाहन फिसल रहे हैं।
बनते ही उखड़ गई प्रभा टॉकीज रोड, न दोबारा बनाई न जांच की
चौकी चौराहे से कंपनी बाग तक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सड़क का निर्माण हो चुका है। करीब एक साल में यह सड़क कई बार धंसी। फिर भी कभी ठीक से उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। स्मार्ट सिटी की इस सड़क पर अब तक लोग ठोकरें खाते हुए सफर कर रहे हैं। हाल ही में गुजरे बारिश के मौसम में इस पर सड़क पर जलभराव से भी लोगों ने भारी परेशानियां झेलीं। सड़क उखड़ी पड़ी होने की वजह से धूल के गुबार उड़ते रहते हैं। फिर भी सड़क की मरम्मत नहीं कराई जा रही है न इस बात की जांच हुई कि सड़क बनने के फौरन बाद क्यों उखड़ गई।
गड्ढों से भर गई नई बनी खुर्रम गौटिया रोड, कई डिप भी टूटे
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत ही ईसाईयों की पुलिया से खुर्रम गौटिया तक साल भर पहले सड़क का निर्माण किया था। है। यहां भी सड़क कई जगह से बुरी तरह उखड़ गई और उसमें गहरे गड्ढे हो गए हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि करोड़ों की लागत से डाली गई जो सीवर लाइन अब तक शुरू भी नहीं हुई है, उसके डिप तक टूटे पड़े हैं। कहीं-कहीं डिप को सड़क से इतना ऊंचा बना दिया गया है कि वाहनों के बंपर तक उनसे टकराकर टूट जाते हैं। सड़क के गड्ढों पर पैचवर्क तक नहीं कराया गया है। आगे बियावानी कोठी के पास सड़क निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है और कुछ जगहों पर सिर्फ बजरी भर दी गई है।
श्यामगंज से सेटेलाइट चौराहे के बीच कर रखा हादसे का इंतजाम
श्यामगंज से सेटेलाइट चौराहे तक सड़क का निर्माण हुए भी अभी एक साल नहीं गुजरा है। इस सड़क पर कई महीनों से जगह-जगह बजरी फैली हुई है जिसे अब तक हटाया नहीं गया है। इस बजरी पर वाहनों का संतुलन गड़बड़ाने से आए दिन बाइक सवार गिरकर चोटिल हो जाते जाते हैं। यहां डिवाइडर का निर्माण इतनी धीमी गति से हो रहा है कि करीब दो महीने में दो सौ मीटर भी डिवाइडर का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इसकी सरिया सड़क की ओर बाहर निकली हुई हैं जो कभी भी हादसे का कारण बन सकती हैं।