बरेली। जिला जेल में इन दिनों क्रिकेट प्रीमियर लीग (जेपीएल) ने धमाल मचा रखा है। बंदियों की टीमें रोज जेल के मैदान पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। हत्या, लूट, चोरी और दहेज हत्या जैसे संगीन अपराधों के आरोपी यहां ट्रैक सूट पहनकर टीम भावना से खेल रहे हैं। जेल अधिकारी इसे कोरोना काल में बंदियों का तनाव दूर करने का जतन बता रहे हैं। रविवार को बाल बंदियों ने शानदार प्रदर्शन कर बड़ों की टीम को शिकस्त दी।
सजायाफ्ता फैजान का विकेट कीपिंग का जवाब नहीं
आंवला के जंगबाजपुर निवासी फैजान हत्या के मामले में साढ़े चौदह साल से जिला जेल में सजा काट रहा है। क्रिकेट फैजान का पंसदीदा खेल है। जेल आने से पहले वह अपने गांव की टीम में खेेलता था। अब जेल प्रीमियम लीग के बहाने उसे फिर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला है। वह मुख्य रूप से विकेटकीपर है। शनिवार के मैच में उसने तीन कैच पकड़े और एक खिलाड़ी को स्टंप आउट किया। इससे पहले मैचों में भी शानदार प्रदर्शन कर चुका है।
दहेज हत्या के आरोपी पवन-बृजेश हैं ऑलराउंडर
दहेज हत्या के मामले में पवन दस साल से जेल में सजा काट रहा है। पवन ऑलराउंडर है। वह जब पिच पर उतरता है तो उसके बल्ले से रन बरसते हैं। पिछले मैच में उसने 42 रन बनाए। उसकी गेंदबाजी भी बेहद घातक है। इस मैच में उसने दो विकेट भी लिए। दहेज हत्या का ही दूसरा आरोपी बृजेश एक साल से जेल में है। उसने दो मैच में सात विकेट लेकर अपना लोहा मनवाया। हालांकि उसका रन रेट कोई खास नहीं रहा।
मणिपुर के तस्कर शोएब की आतिशी बल्लेबाजी के कायल हैं सभी
स्मैक तस्करी के मामले में मणिपुर निवासी शोएब काफी समय से जेल में बंद है। उसके खिलाफ चार्जशीट भी हो चुकी है। शोएब जेल में रहकर स्थानीय बंदियों से काफी घुल मिल गया है और अच्छी हिंदी भी बोलने लगा है। जेल प्रीमियर लीग में वह अहाता नंबर एक की टीम से खेल रहा है। शोएब की आतिशी बल्लेबाजी के सभी कायल हैं। एक मैच में उसने 15 गेंदों में अर्द्धशतक बनाकर कीर्तिमान स्थापित कर दिया।
साथी खिलाड़ी देते हैं हौसला, जश्न का माहौल
जिन अहातों की टीम का मैच होता है, उसके दूसरे बंदियों को मैदान में दर्शक के रूप में मैदान मेें मौजूद रहने का मौका मिलता है। वे अपने अहाते की टीम के खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हैं और आउट होने पर उसे सांत्वना देते हैं। जेल के बंदियों की मानें तो इतना खुशनुमा माहौल जेल में पहले कभी नहीं रहा। मैच के दौरान कमेंट्री के साथ ही साउंड सिस्टम का भी इंतजाम किया गया है। हर चौके-छक्के, आउट होने या अपील पर अलग-अलग तरह की धुनें बजती हैं।
जेल स्टाफ कर रहा कमेंट्री
जेपीएल में जेल के स्टाफ की भी सहभागिता है। जेल वार्डर से लेकर बड़े ओहदे वाले अफसर भी रुचि के मुताबिक अंपायर से लेकर कमेंटेटर तक का दायित्व निभा रहे हैं। बाकी दिन एक मुकाबला तो शनिवार और रविवार को दो मुकाबले होते हैं। आठ अहातों की टीमें मैदान में हैं। मैच अभी कई दिन चलेंगे। लीग शुरू होने से 15 दिन पहले से इसकी तैयारी की गई थी। हर बैरक में करीब 350 लोग हैं, इनमें से 15 खिलाड़ी छांटना भी मुश्किल काम था।
पिछले दिनों रामलीला से मची थी धूम
जेपीएल से पहले जेल अधीक्षक के प्रयास से रामलीला का मंचन कराया गया था। इसमें कलाकार भी बंदी थे और दर्शक भी। इसमें भी हत्या समेत दूसरे दूसरे गंभीर अपराधों में लिप्त अपराधियों ने रामलीला के पात्रों का शानदार अभिनय किया था। बाकी बंदियों ने अपनी बैरकों में रहकर केबल पर इसका लाइव प्रसारण देखा था।
नौजवानों की टीम ने बड़ों को धूल चटाई
रविवार दोपहर दो मुकाबले हुए। पहला मैच अहाता संख्या पांच और नौ के बीच हुआ। इसमें अहाता नौ की टीम विजयी रही। दूसरा मैच क्वारंटीन बैरक टीम और अहाता संख्या छह के बीच हुआ। अहाता छह बैरक को बच्चा बैरक कहा जाता है। इसमें 18 से 21 साल की उम्र के लड़के हैं। अहाता छह की टीम की घातक गेंदबाजी के आगे विपक्षी टीम 12 ओवर में 75 रन के स्कोर पर ही ढेर हो गई। बच्चा बैरक टीम के कप्तान शहजिल के नेतृत्व में बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन करके सात विकेट से मैच जीत लिया।
जिला जेल में कोरोना संक्रमण को लेकर बंदियों की परिवार के लोगों से काफी समय से मुलाकात बंद है। ऐसे में वे अवसाद के शिकार न हों और तन, मन से स्वस्थ रहें, इसीलिए जेल में क्रिकेट मैच कराए जा रहे हैं। - विजय विक्रम सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक