अगर फर्म, स्काई वॉक के लुक को और बेहतर बनाने के लिए रेलिंग में बदलाव के कुछ सुझाव देती है तो उसके अनुसार निर्माण कराया जा सकता है। असल में स्काई वॉक के लुक, उपयोगिता और सुरक्षा मानकों को देखते हुए रेलिंग का निर्णय होना है। बाकी निर्माण लगभग पूरा है। फिनिशिंग का काम चल रहा है। विभिन्न फर्मों से संचालन के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। प्रस्ताव आने पर वित्तीय और तकनीकी क्षमता का परीक्षण होगा।
आंकड़ों की नजर से
11 करोड़ 18 लाख रुपये है लागत
अप्रैल 2022 को शुरू हुआ था निर्माण
6 जनवरी 2024 को निर्माण होना था पूरा
यह होगी खासियत
स्काई वॉक पर पहुंचने के लिए लिफ्ट और स्वचालित सीढ़ियों की सुविधा है। चौबीस घंटे पॉवर बैकअप का इंतजाम किया गया है, ताकि कोई लिफ्ट में फंसा न रह जाए। स्काई वॉक के ऊपर मार्केट होगी और लोग चाट पकौड़ी, आलू की टिक्की का मजा ले सकेंगे। वाईफाई की सुविधा दिए जाने पर भी विचार हो रहा है। ताकि युवा वर्ग आकर्षित हो। बस दुकानों का साइज और संचालन का तरीका अभी तय होना है।
सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता राजेंद्र आर्या ने बताया कि स्काई वॉक की जब से कल्पना की गई तभी से यह बात तय थी कि सुरक्षा के उपाय होंगे। उसकी मार्केट की निगरानी इंट्रीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सिस्टम से होगी, लेकिन रेलिंग को लेकर अभी तक डिजाइन फाइनल न होना लेट-लतीफी दर्शाता है। अगर स्मार्ट सिटी के अभियंताओं का नजरिया शुरू से ही स्पष्ट होता तो अब तक रेलिंग भी लग गई होती और इसका संचालन भी शुरू हो जाता।