विदेशों में तो इस तरह का कल्चर है कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए लोग कारों का कम से कम इस्तेमाल करते हैं लेकिन बरेली के लोग बेतरतीब ट्रैफिक सिस्टम से आजिज आकर कार का इस्तेमाल न करने को मजबूर हैं। ऑटो रिक्शा के बाद ई-रिक्शा की वजह से हालात और खराब हो गए हैं। आए दिन शहर में जाम लगना आम बात है। एक साल पहले शहामतगंज और आईवीआरआई ओवरब्रिज का निर्माण शुरू होने के बाद शहर का ट्रैफिक सिस्टम इस कदर बिगड़ गया कि इससे बड़े लोगों के जीने का अंदाज ही बदल गया है। उन्होंने जाम के झाम से बचने के लिए कारों को छोड़कर स्कूटी और बाइक का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
हमारा 22 लोगों का परिवार है। घर में कई कारें हैं, लेकिन शहर में शहामतगंज और आईवीआरआई ओवरब्रिज का काम चलने की वजह से जाम की समस्या रहती है। लिहाजा हमने हाल ही मैं पांच स्कूटी खरीदी हैं। स्कू टी और बाइकों से ही परिवार के लोग शोरूमों पर आते हैं। शहर से बाहर जाने के लिए ही अब कार का इस्तेमाल करते हैं। इससे हमारे परिवार के लोगों को फायदा भी हो रहा है। समय के साथ-साथ तेल भी बच रहा है। कार का इस्तेमाल कम हो तो जाम की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी।
- नरेंद्र गुप्ता, सीएमडी, सलेक्शन प्वाइंट
मेरे घर में दो कारें हैं, लेकिन मैं साइकिल और स्कूटी चलाती हूं। इससे कई फायदे हैं। तेल की बचत होती है। प्रदूषण भी कम होता है। शहर में दो ओवरब्रिज बनाए जाने का काम होने की वजह जाम की समस्या बढ़ गई है। ऐसे में स्कूटी से शहर में किसी भी इलाके में आसानी से चली जाती हूं। कार में बंद होकर चलने से किसी से मुलाकात भी नहीं हो पाती है। स्कूटी से परिचितों से भी आसानी से मुलाकात होने से सामाजिक दायरा बढ़ता है।
- डॉलिमा अग्रवाल, इंटीरियर डेकोरेटर
हमारे परिवार के पास तीन कारें हैं। मेरे अलावा पत्नी डॉ. मोनिका माहेश्वरी और पिताजी केके माहेश्वरी की कारें शहामतगंज और आईवीआरआई ओवरब्रिज का काम चलने की वजह से ट्रैफिक सिस्टम बिगड़ने पर ज्यादातर खड़ी रहती हैं। आईएमए समेत कई संस्थाओं के अलावा भाजपा से जुड़े होने की वजह से शहर के हर इलाके में जाना होता है। इसके लिए मैं तो बाइक ही इस्तेमाल करता हूं। पिता जी भी बाइक ही चलाते हैं।
- डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, एमडी गंगाचरण
मैं मॉडल टॉउन में रहता हूं। ट्रांसपोर्ट नगर में कारोबार करता हूं। घर में कार भी है, लेकिन शहर के शहामतगंज और आईवीआरई में ओवरब्रिज का निर्माण होने से जाम और अधिक लगने लगा है। अब शहर की गलियां भी जाम हो जाती हैं। ई-रिक्शा शहर में जाम की सबसे बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। प्रदूषण और जाम से बचने के लिए स्कूटी खरीद ली है। इससे काफी राहत मिली है। इससे पहले तो बुरा हाल था।
- अश्वनी ओबराय, ट्रांसपोर्टर
फोटो----
मैं राजेंद्र नगर में रहता हूं। उनके यहां से नव दुर्गा मंदिर, साहूकारा जाने के लिए कार का कोई रास्ता नहीं है। शहर के शहामतगंज और आईवीआरआई ओवरब्रिज बनने की वजह से इन सड़कों पर कार लेकर जा नहीं सकते हैं। सेटेलाइट होकर जाने पर बहुत दूर पड़ता है। इसी मजबूरी में बाइक खरीद ली है। अब बानखाना से होकर नव दुर्गा मंदिर चला जाता हूं। इससे बचत के साथ प्रदूषण के राहत और मंदिर की दूरी भी कम हो गई है-गुलशन आनंद, भाजपा नेता
मॉडल टाउन से शहामतगंज कार से आने के लिए सेटेलाइट बस अड्डे के अलावा और कोई रास्ता नहीं है, क्योंकि यहां ओवरब्रिज का निर्माण चल रहा है। घर में कार भी है, लेकिन मेरी ट्रांसपोर्ट कंपनी का ऑफिस शहामतगंज में है, इसलिए मजबूरी में कार छोड़कर स्कूटी खरीद ली है। स्कूटी पर सवार होकर गलियों से निकलकर समय से ऑफिस पहुंच जाता हूं। इससे समय के साथ तेल की भी बचत हो रही है। ऐसा ही ज्यादातर लोग करें तो जाम नहीं लगेगा।
- गुरमीत सिंह बख्शी, मालिक बख्शी ट्रांसपोर्ट, शहामतगंज