SIT will interrogate Manoj and Ajay face to face in the case of tax evasion of 100 crores
बरेली। करोड़ों की टैक्स चोरी के मामले में पकड़े गए मनोज जायसवाल और अजय जायसवाल को एसआइटी आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी ताकि पता लगाया जा सके कि कौन सही बोल रहा है कौन झूठ। शक है कि अजय जायसवाल के नाम पर मनोज ने और भी कई जगह पैसा लगाया होगा लेकिन पकड़े जाने के बाद अब अजय नाटक कर रहा है। अगर उसे यह सब उसे पता नहीं था तो वह छिप क्यों रहा था।
सहारनपुर की टपरी डिस्टिलरी में छापे के दौरान करोड़ों की टैक्स चोरी पकड़ी गई थी। पता चला था कि शराब फैक्टरी से एक गेटपास पर दो ट्रक शराब निकाली जा रही थी। इन ट्रकों ट्रक को कानपुर और उन्नाव में अजय जायसवाल के नाम पर गोदामों पर भेजा जा रहा था। एसआईटी ने कानपुर के अजय जायसवाल के गोदाम और अन्य शराब की दुकानें सील कर दी थीं। बरेली में भी गोदाम सील कर दिया था। 28 जनवरी को गिरफ्तारी के बाद मनोज जायसवाल ने भी यही बताया था कि सारा काम अजय जायसवाल का है। उससे उसका कोई लेना-देना नहीं है।
मनोज ने एसआईटी को बताया था कि वह अजय जायसवाल का बरेली का गोदाम देखता है। दो दिन बाद एसटीएफ ने बरेली से अजय को गिरफ्तार किया तो पता चला कि जिस अजय जायसवाल के नाम पर शराब का साम्राज्य खड़ा है, उसके पास तो कुछ है ही नहीं। अजय ने बयान दिया कि शराब का पूरा कारोबार मनोज का है। वह मनोज के यहां 15 हजार रुपये की नौकरी करता है। मनोज ने उसका आधार, पैनकार्ड और फोटो ले लिए थे। उसी के जरिए उसके नाम पर कानपुर, उन्नाव, बरेली में शराब गोदाम खड़े किए।
एसआईटी अभी अजय को बयान को पूरा सच नहीं मान रही है। शक जताया जा रहा है कि यह तो हो सकता है कि कारोबार में मनोज का पैसा लगा हो लेकिन ऐसा होना मुश्किल है कि अजय को कुछ पता न हो। एसआईटी अब यह पता लगा रही है कि अगर शराब के कारोबार में करोड़ों रुपया मनोज का लगा है तो यह पैसा उसके पास आया कहां से। उसकी आय का स्रोत्र क्या है। इसके लिए मनोज व अजय के खातों को खंगाला जा रहा है। अजय ने यह भी बताया है कि उसके बैंक खाते में सिर्फ साठ हजार रुपये हैं। मनोज के खाते कहां-कहां है, अभी इसकी जानकारी नहीं हो पाई है। इसके अलावा कानपुर में पकड़े गए मैनेजर ने जो बयान दिए हैं, उनका भी सत्यापन कराया गया है। बताया जा रहा है कि उसने मनोज के कारोबार के बारे में पूरी जानकारी एसआईटी को दे दी है।