आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को फंडिंग करने व देश के युवाओं को बरगलाने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) की दस्तक से बरेली में शुक्रवार को भी दिनभर हलचल रही। सिर्फ एक सिम खोने की वजह से मजदूर को 12 घंटे तक संयुक्त टीम के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। हालांकि, इनपुट के मुताबिक स्थानीय लोगों के जुड़ाव से संबंधित साक्ष्य नहीं मिले। टीम ने मजदूर को छोड़ दिया, पर उसके दस्तावेज साथ ले गई है।
एनआईए ने बृहस्पतिवार को मीरगंज क्षेत्र के गांव सैंजना निवासी दो भाइयों नरेश और महेंद्र से पूछताछ की। एनआईए व एटीएस की संयुक्त टीम ने दोनों भाइयों को शाम छह बजे छोड़ा। इनमें से बड़ा भाई महेंद्र एक ओर बैठा रहा, पूछताछ का पूरा फोकस छोटे भाई नरेश पर ही रहा।
जांच में नहीं मिले साक्ष्य तो नरेश को छोड़ा
शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने दोनों भाइयों, ग्राम प्रधान व पुलिस सूत्रों से बात कर जो जानकारी निकाली, उसके मुताबिक नरेश का सिम टेरर फंडिंग व अन्य गलत गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा था। नरेश ने टीम को बताया कि वह करीब पांच साल तक हरियाणा में रहा। वहां उसने मजदूरी की। इस दौरान नरेश का एक सिम खो गया था। नरेश ने उसे तलाशा, पर वह नहीं मिला। तब उसने दूसरा सिम ले लिया।