बरेली। पशुपालकों को घर-घर पशु चिकित्सा सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू की गई मोबाइल वेटनरी यूनिट (एमवीयू) जिले में बदहाल व्यवस्था की भेंट चढ़ रही है। हालत यह है कि पशु गंभीर रूप से बीमार होने या घायल होने के बावजूद समय पर मोबाइल यूनिट घंटों बाद भी नहीं पहुंच पा रही है। कई मामलों में बरेली के विकास खंडों से की गई कॉल उत्तराखंड के कॉल सेंटर में पहुंच रही है, जिससे शिकायत दर्ज ही नहीं हो पा रही। जिसके चलते पशुओं का समय पर उपचार नहीं हो पाता और कई मामलों में उनकी मौत तक हो जाती है।
पशुपालकों को घर बैठे पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिले को मई 2023 में नौ मोबाइल वेटनरी यूनिट उपलब्ध कराई गई थीं। इनका उद्देश्य पशुओं का मौके पर इलाज, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा देना था। पशु के बीमार होने या सड़क हादसे में घायल होने पर जब भी 1962 सेवा पर कॉल करो तो कॉल रिसीव ही नहीं होती। अगर किसी कारणवश कॉल उठ जाती है तो शिकायत दर्ज करते समय राज्य तक बदल जाते हैं, जिसके चलते सेवा का लाभ सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में विभाग के मानव संपदा पोर्टल पर एमवीयू से संबंधित कुल 721 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें करीब 90 प्रतिशत शिकायतें कॉल सेंटर पर शिकायत दर्ज न होने या फिर कॉल गलत स्थान पर ट्रांसफर होने से संबंधित हैं। सांसद और एमवीयू के नोडल अधिकारी ने भी कॉल सेंटर की तकनीकी गड़बड़ी को लेकर विभाग के निदेशक को पत्र भेजकर शिकायत दर्ज कराई है। इसके बावजूद अब तक व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो सका है।
शिकायत के बाद भी नहीं पहुंची टीम
मीरगंज ब्लॉक के राम सिंह ने 23 जुलाई को गाय बीमार होने की शिकायत 1962 पर दर्ज कराई थी। 27 जुलाई तक भी एमवीयू उनके घर इलाज के लिए नहीं पहुंची। बाकरगंज निवासी हरिदयाल लोधी ने 19 जुलाई को भैंस बीमार होने की शिकायत की थी। एक सप्ताह बीतने के बाद भी किसी विभागीय डॉक्टर ने उनसे संपर्क नहीं किया।
वर्जन
एमवीयू संचालन का कंट्रोल रूम आगरा में है। इस सेंटर पर ऑपरेटरों की संख्या कम है। कई बार एक ही समय पर कई लोग एक साथ कॉल करते हैं तो तय समय पर शिकायत दर्ज नहीं हो पाती है। हालांकि विभागीय स्तर से कई बार कंट्रोल रूम में ऑपरेटर बढ़ाने को पत्र भेजा गया है, लेकिन स्थिति जस की तस है। - डॉ. मनमोहन पांडेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी