चौपुला पुल पर भी तैनात होगी गारद
गोदारा की आईडी से दोबारा धमकी आने के बाद पुलिस व खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। पाटनी परिवार को एसएसपी ने गनर व गारद पहले ही मुहैया करा दिया था। अब चौपुला पुल पर भी गारद लगाने की तैयारी है। अधिकारियों का मानना है कि पुल से भी रेकी की जा सकती है, इसलिए पाटनी की गली के सामने पुल के संबंधित प्वॉइंट पर पुलिस निगरानी बढ़ाएगी।
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कूटरचित दस्तावेज की धारा बढ़ेगी
स्थानीय होटलों में आरोपियों ने आधार को एडिट करके फर्जी दस्तावेज लगाए थे। इसलिए उनके खिलाफ कोतवाली में दर्ज मुकदमे में अब पुलिस कूटरचित दस्तावेज तैयार कराने की धारा जोड़ेगी। कोतवाल अमित पांडेय ने इसकी पुष्टि की।
सरगना रविंद्र देता था खर्च
जांच में पता लगा है कि मुठभेड़ में मारे गए मुख्य शूटर रविंद्र का गोल्डी व रोहित बरार गैंग ने सीधा जुड़ाव था। रविंद्र ने ही अरुण के जरिये अन्य शूटरों को 20 से 25 हजार रुपये में तय किया था। उन्हें मोबाइल रिचार्ज तक का खर्च रविंद्र ही देता था।
शुक्रवार को मुठभेड़ में घायल हुए रामनिवास उर्फ दीपू ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसका गैंग से सीधा ताल्लुक नहीं है। रविंद्र से भी उसकी ज्यादा बात नहीं होती थी। रविंद्र ज्यादातर शांत या मोबाइल में व्यस्त रहता था। उसे और बाकी लड़कों को अरुण ने ही रविंद्र के कहने पर बुलाया था।
किसी को 20 तो किसी को 25 हजार रुपये देने का वादा किया गया था। वह रकम भी काम के बाद ही मिलनी थी। हालांकि इस दौरान उनके आने-जाने, रुकने, खाने व मोबाइल आदि के खर्च का भुगतान अरुण के कहने पर रविंद्र ही करता था। रामनिवास ने ये भी स्वीकार किया कि रविंद्र उसके लापरवाह रवैये से खुश नहीं था और उसे डांटता रहता था।
अनिल के थे अहसान, मामा बोलता था रविंद्र
जेल गए आरोपी अनिल ने शाही पुलिस को बताया कि उसका गैराज है, जबकि अरुण ट्रांसपोर्ट के धंधे से जुड़ा है। इस वजह से उनका परिचय हो गया था। रविंद्र के एक मामा सोनीपत में रहते हैं जो अनिल के दोस्त हैं। इसी वजह से उसकी रविंद्र से करीबी हुई।
एक मामले में जब घरवाले रविंद्र की जमानत नहीं करा पा रहे थे तो अनिल ने उसकी जमानत कराई थी। तब से रविंद्र उसे मामा कहने लगा था। बताया कि रविंद्र का अपना घर होने के बावजूद अक्सर पुलिस से छिपने के लिए वह उसके गैराज की दीवार कूदकर अंदर सो जाता था।