अमावस्या को तीर्थ स्नान और जप, दान का होता है विशेष महत्व
बरेली। सावन के तीसरे सोमवार पर शिव भक्तों की मनोकामना पूरी करने वाला एक शुभ संयोग बना है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक तीसरे सोमवार पर सोमवती अमावस्या का योग करीब 20 सालों बाद बना है। इसमें विधि विधान से की गई शिव पूजा सफल होती है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक पुरुषार्थ चिंतामणी के अनुसार अगर अमावस्या सोमवार, मंगलवार, गुरुवार को हो तो उस योग को पुष्कर योग कहते हैं। इन योगों का फल सूर्य ग्रहण में किए हुए स्नान, दान, पुण्य आदि से भी सौ गुना अधिक माना गया है। सोमवती अमावस्या के योग में यदि चंद्रमा अश्विनी, पुनर्वसु, मूल, रोहिणी, विशाखा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, श्रवण इन नक्षत्रों में से किसी एक में हो तो, ऐसे योग में तैयार की गई जड़ी बूटी अनेक प्रकार के कायिक और मानसिक रोगों में लाभकारी होती है। सोमवार को चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र और शनि ग्रह भी अपनी राशि में रहेंगे। बताया कि अमावया तिथि 20 जुलाई की दोपहर 12:10 बजे शुरू होकर रात 11.02 बजे तक रहेगी। ब्यूरो