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अपने पहले बच्चे का मुंह भी नहीं देख सकीं शिखा

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पति के साथ शिखा। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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सात महीने की गर्भवती होने के बाद भी लगा दी थी चुनाव ड्यूटी, कोरोना संक्रमित होकर चली गई जान
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प्रीमैच्योर बच्चे को जन्म देने के बाद तोड़ दिया दम

बरेली। राहुल जब भी अपने नवजात बेटे को देखते हैं, मुस्कराहट के बजाय उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। इस बच्चे के लिए उन्होंने अपनी पत्नी शिखा के साथ तमाम सपने देखे थे लेकिन पंचायत चुनाव की ड्यूटी ने उन्हें इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया कि बच्चे का जन्म ही अपार दुखों के बीच हुआ। सात महीने की गर्भवती शिखा चुनाव ड्यूटी करने के बाद कोरोना संक्रमण लेकर लौटीं। अस्पताल में सांसें टूटने लगीं तो डॉक्टर ने समयपूर्व प्रसव कराकर बच्चे को तो बचा लिया लेकिन शिखा उसका चेहरा देखे बगैर ही दुनिया से कूच कर गईं।
आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल नगला की सहायक अध्यापक शिखा सक्सेना की दो साल पहले ही शादी हुई थी। चुनाव ड्यूटी का आदेश आया तो शिखा मां बनने वाली थीं। पति राहुल के साथ जिंदगी में आने वाले नए मेहमान के लिए नित नई तैयारियों में लगी हुई थीं। राहुल कहते हैं कि शिखा अपनी नौकरी के लिए इतनी समर्पित थीं कि सात महीने की गर्भवती होने के बाद भी अवकाश नहीं ले रही थीं लेकिन चुनाव ड्यूटी लगी तो घबरा गईं। दोनों ड्यूटी कटवाने के लिए विकास भवन पहुंचे लेकिन वहां कोई सुनने वाला ही नहीं था। प्रशासन के आदेश में साफ चेतावनी दी गई थी कि चुनाव ड्यूटी न करने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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काफी घबराहट में शिखा चुनाव ड्यूटी करने गईं। लौटीं तो बुखार था। डॉक्टर से दवा ली लेकिन दूसरे दिन तेज खांसी भी हो गई। इसके बाद लगातार हालत और बिगड़ती चली गई। उन्हें शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड किया तो पाया कि बच्चे की हालत भी खराब हो रही है। डॉक्टरों की सलाह पर शिखा का समयपूर्व प्रसव कराना पड़ा। इसके बाद शिखा की तबीयत और बिगड़ी तो डॉक्टर ने रेमडेसिविर इंजेक्शन लाने को कहा। उन्होंने इंजेक्शन के लिए भरसक कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुए। बच्चे को जन्म देने के दो दिन बाद ही शिखा की सांसें थम गईं। इस बीच शिखा की कोविड टेस्ट रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ चुकी थी।
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आपबीती सुनाते हुए राहुल रो पड़ते हैं। कहते हैं, अभी तो हम दोनों ने सपने ही देखने शुरू किए थे। शिखा के साथ अपने बच्चे के भविष्य के लिए रोज बातें होती थीं लेकिन कोरोना ने हमारी जिंदगी बर्बाद कर दी। 15 दिन तक आईसीयू में रहने के बाद बच्चा अब घर पर है जिसे राहुल खुद संभाल रहे हैं। राहुल को इस बात पर गुस्सा है कि प्रशासन ने उनकी सात महीने की गर्भवती पत्नी को चुनाव ड्यूटी पर क्यों लगा दिया। कहते हैं. उनका छोटा सा परिवार ठीक से बसने से पहले ही बुरी तरह बिखर चुका है।

कहते थे ड्यूटी कटवा लेंगे तो चुनाव कैसे होगा, अब परिवार ही बेसहारा

चंद्रपाल सिंह गंगवार दमखोदा ब्लॉक के मनिकापुर स्कूल में तैनात थे। चंद्रपाल के साले देवपाल बताते हैं कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगी तो परिवार में सभी ने उसे कटवाने को कहा लेकिन चंद्रपाल का कहना था कि सभी ड्यूटी कटवा लेंगे तो कैसे काम चलेगा। 15 अप्रैल को चुनाव ड्यूटी करके शाम को घर लौटे तो तबीयत ठीक नहीं थी। पहले तो लगा कि थकान की वजह से ऐसा है लेकिन रात में ही उन्हें बुखार आ गया। डॉक्टर की सलाह पर दवा शुरू कर दी। जांच कराई तो संक्रमित पाए गए। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन फिर भी नहीं बच पाए। चंद्रपाल के दो बेटे हैं, एक आर्यन जो हाईस्कूल में पढ़ रहा है और दूसरा अर्जुन जो पांचवीं में है। देवपाल कहते हैं कि परिवार के सदस्य की कोई भरपाई नहीं कर सकता लेकिन कम से कम सरकार को यह तो जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि ऐसे परिवार का भविष्य तबाह न हो।
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