बरेली। शनि जयंती इस बार छह जून को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शनि का पूजन कल्याणकारी होगा और कष्टों से मुक्ति मिलेगी।
ज्योतिषाचार्य कृष्ण के शर्मा के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को शनि जयंती मनाई जाती है। भगवान शनि, सूर्य देव और छाया देवी के पुत्र हैं। उन्हें नवग्रहों में प्रमुख स्थान प्राप्त है। न्याय के देवता के रूप में प्रतिष्ठित शनि सबसे धीमा चलने वाला ग्रह है। ज्योतिष में शनि की अशुभ दृष्टि के कारण ही इसे क्रूर या पापी ग्रह की संज्ञा दी गई है। शनिदेव मकर और कुंभ राशियों के स्वामी हैं।
इस तरह करें पूजन
सुबह स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा की चौकी पर काले रंग के वस्त्र को बिछाएं और उस पर शनिदेव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। घी या तेल का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं। शनि देव की प्रतिमा को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान कराएं। इसके बाद कुमकुम, काजल, अबीर, गुलाल, फूल आदि अर्पित करें। भगवान शनि को इमरती या तेल से बनी मिठाई का भोग लगाएं। ऐसा मान्यता है कि जिन जातकों पर शनि की साढ़े साती या ढैया चल रही है, शनिदेव की उपासना से उनको लाभ मिलता है। शनि देव की कृपा प्राप्ति के लिए शनि जयंती सर्वोत्तम दिन है।