बरेली। बड़े घराने की बहू का दर्जा पाने को हक की लड़ाई लड़ रही शमा को ‘अमर उजाला’ की पहल पर सफलता मिल गई है। परिवार वालों ने शुक्रवार को उनके बेटे की फीस जमा कर दी है। इसकी रसीद भी शमा को घर पर पहुंचा दी गई है। साथ ही घर पर राशन भी पहुंचा दिया है।
शीशगढ़ क्षेत्र में स्थित पढेरा फार्म निवासी सुलेमान बेग ने आठ साल पहले देवरनियां निवासी गरीब परिवार की शमा से निकाह किया था। उन्होंने शमा को अपने घर ले जाने के बजाए पहले राजेंद्र नगर में किराए के मकान में रखा था बाद में सिद्धार्थ नगर में घर बनाकर दे दिया था लेकिन अपने घर लाने को राजी नहीं हुए। पिछले दिनों दोनों में किसी बात को लेकर अनबन हो गई थी और सुलेमान ने उसे छोड़ने की बात कही थी। शमा ने उत्पीड़न का आरोप लगाकर महिला थाने में सुलेमान बेग पर मुकदमा भी लिखा दिया। जिसकी सुनवाई अभी मध्यस्थता केंद्र में होनी है। शमा ने सुलेमान पर बीवी का दर्जा न देने, घर के खर्च के साथ बेटे शेरान की फीस तक जमा न करने का आरोप लगाया। ‘अमर उजाला’ ने उसकी पीड़ा को प्रमुखता से उठाया तो परिवार वालों का मन बदल गया। सुलेमान के भाई डॉ. अनीस बेग ने शमा को अपने परिवार की बताते हुए गुरुवार से इस मामले को सुलझाने की पहल की। शुक्रवार को उनके बेटे शेरान की दो माह की फीस स्कूल के बैंक खाते में जमा कर दी है। जिसकी रसीद शमा को घर पहुंचा दी गई है। साथ ही रसोई का सामान और घरेलू खर्च भी शाम को पहुंचाना शुरू कर दिया गया है। दोनों के बीच गलतफहमी से हुई अनबन को भी आपस में बातचीत की कोशिश करते हुए दूर किया जा रहा है।