बरेली।
मलूकपुर के बाजदारान मोहल्ले में जर्जर घर की ऊपर की मंजिल ढहने से परिवार के तीन मासूम बच्चे मलबे में दब गए। धमाके की आवाज सुनकर मोहल्ले के लोग दौड़ पड़े। मलबे में परिवार के लोगों के दबे होने की आशंका के बीच मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया, करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद मासूमों को मलबे से निकाला जा सका। इसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों को सांस लेने मेें दिक्कत आ रही थी, लेकिन वह खतरे से बाहर है।
मोहल्ले में पतंग बनाने वाले चांद मियां का बाजदारान मोहल्ले में दो मंजिला खानदानी मकान है। वह अपनी बुजुर्ग मां, बीवी शबनम और तीन बच्चों के साथ रहता था। बुधवार शाम करीब साढ़े सात बजे चांद मियां के तीन बच्चे अमन (7), सैफ (9), साजिया (10) कमरे मेें टीवी पर सीरियल देख रहे थे। वहीं बुजुर्ग मां, बीवी शबनम और शहनाज आंगन में रात के खाने की तैयारी कर रही थी। उन्होंने बताया कि अचानक तेज आवाज के साथ ऊपर की मंजिल का पूरा मलवा नीचे आ गिरा। कमरे में टीवी देख रहे तीन बच्चे उस मलबे में दब गए। घर की मंजिल ढहने के बाद महिलायें शोर मचाती हुई बाहर की तरफ भागी। मोहल्ले के लोगों ने एकजुट होकर मलबा हटाने लगे। मलबे से बच्चों को मोहल्ले वालों ने निकालकर पास के निजी अस्पताल में पहुंचाया।
नगर में हो चुकी थी शिकायत
मोहल्ले के लोगों ने बताया कि यह मकान करीब 150 साल पुराना है। परिवार की माली हालत ठीक नहीं है, इसलिए उसकी मरम्मत भी नहीं करवा पा रहे थे। इस बाबत नगर निगम से शिकायत हो चुकी थी। मोहल्ले के लोगों ने नगर निगम में लिखित खतरा जता चुके थे।
खुले आसमान के नीचे बिताई रात
आर्थिक रूप से कमजोर चांद मियां का मकान ढहने के बाद पूरा परिवार सड़क पर आ गया। रात के खाने की व्यवस्था भी पड़ोसियों ने मिलकर की। उनके घर का पूरा सामान भी मलबे में दब गया। देर रात तक परिवार मलबे में अपना सामान ढूंढता रहा। रात भी खुले आसमान के नीचे बिताई।
सूचना के बाद भी पुलिस नहीं पहुंची
लोगों में हादसे के बाद रोष नजर आया, उनका कहना था कि सूचना के बावजूद पुलिस नहीं पहुंची। बचाव कार्य भी लोगों ने ही आगे आकर किया, वरना बच्चों की जान पर बन आती। देर रात कुछ सामाजिक संगठन भी मदद के लिए मलूकपुर में पहुंचे।