बरेली। नगर निगम की डोर टू डोर कूड़ा योजना इस बार ट्रायल में ही फ्लाप होती नजर आ रही है। हरी भरी के कर्मचारी घर-घर कूड़ा उठाने नहीं पहुंच रहे हैं। इसके चलते घरों का कूड़ा सड़क या नाले नालियों में फेंका जा रहा है। नाले नालियां बरसात में चोक हो रहे हैं। कूड़े के ढेर दलदल में तब्दील होने से सांस लेना मुश्किल है। हरी भरी कूड़ा उठाने का काम पहले 10 वार्डों का था। अब यह फर्म पर पूरे शहर से घर-घर जाकर कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी है। पार्षद से लेकर आम लोग भी डोर टू डोर के काम से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।
नगर निगम ने दो अक्टूबर 2015 से डोर टू डोर कूड़ा योजना शुरू की थी। पहले सात एजेंसियों में प्रत्येक को 10 वार्डोँ से घर-घर कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इनको पहले 18 रुपये प्रति क्विंटल रेट से भुगतान कर दिया गया जो कि लखनऊ नगर निगम से भी ज्यादा था। बाद में कूड़ा उठान के रेट घटाकर 11 रुपये प्रति टन किए गए। इससे दो ठेकेदार काम बीच में ही छोड़कर चले गए। पांच ठेकेदार नाम मात्र को ही कूड़ा उठाते रहे। जब काम ठीक से नहीं चला तो मेयर और नगर आयुक्त ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट चलाने से लेकर शहर में प्रत्येक घर से कूड़ा उठाने का काम दिल्ली की कंपनी हरी भरी को दे दिया। इस संस्था से अभी ये काम ट्रायल के तौर पर ही लिया जा रहा है। इसके लिए नगर निगम को छह महीने तक कोई भुगतान नहीं करना है लेकिन कंपनी के कर्मचारी एक महीने में ही घर-घर कूड़ा उठाने में लापरवाही बरतने लगे हैं। 70 वार्डों में 350 ठेले चलाकर कूड़ा उठाने का दावा एजेंसी कर रही है लेकिन 40 से 50 हजार की आबादी वाले वार्डों में दो से तीन ठेले भी नहीं पहुंच रहे।
डोर टू डोर की कहानी, जनता की जुबानी
कूड़ा उठाने कोई नहीं आता। गंदगी के ढेर लगे हैं। बरसात होते ही बदबू आती है। घर-घर से कूड़ा उठाने का यही हाल रहा तब तो कुछ दिनों बाद यहां रहना मुश्किल हो जाएगा- डा. हेम कुमार गौतम, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
न कहीं ठेले दिखाई देते हैं और न ही कर्मचारी। पता नहीं डोर टू डोर कौन चला रहा है। हमारी कालोनी में तो कूड़े के ढेर लगे हैं। कहां लेकर जाएं कूड़ा। सौरभ मिश्रा, व्यवसायी, पीलीभीत बाईपास रोड
रोजाना कूड़ा उठता है तो सड़क भी साफ सुथरी रहती है। वार्ड में सफाई कर्मचारी रोजाना कूड़ा उठाने नहीं आते। बरसात में सड़क और गली में पानी भरता है। कूड़े के ढेर से बदबू आती है। वरुण कुमार, राजेंद्र नगर
इस डोर टू डोर से अच्छे तो नगर निगम के कर्मचारी थे। वह कम से कम रोजाना आते तो थे। एक या दो ठेले दिखते हैं। वह घर में आकर कूड़ा भी नहीं मांगते। नीतू, खन्ना, गृहणी
हम अपने घर पर बेहतर सफाई रखते हैं। यहां तक कि गली भी साफ कर लेंगे। कम से कम कूड़ा ले जाने का इंतजाम तो हो। डोर टू डोर कर्मचारी रोजाना टाइम पर आएं तो सड़क पर कूड़े के ढेर न लगें। पता नहीं डोर टू डोर कैसे चल रही है। मंजू भार्गव, गृहणी
क्या कहते हैं पार्षद --
डोर टू डोर कूड़ा योजना पूरी तरह फ्लाप है। ये कमाने खाने के लिए चल रही है। शहर की सफाई से इसका कोई वास्ता नहीं। मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि फ्लाप होने के बाद भी ये योजना क्यों चल रही है। राजेश अग्रवाल, नेता सपा समर्थित पार्षद दल
नगर निगम ने हरी भरी के साथ डोर टू डोर का अनुबंध करके जनता के साथ धोखा किया है। हरी भरी कूड़ा उठाने में पूरी तरह फेल है। अभी तक कार्ययोजना ही नहीं बनाई है तो सफलता कैसे मिलेगी। विकास शर्मा, नेता भाजपा पार्षद दल
हमारे वार्ड में हरी भरी का कोई कर्मचारी कूड़ा उठाने नहीं आता। मोहल्ले के लोग अपने घर का कूड़ा खुद डलावघर में डालकर आते हैं। सड़क पर कूड़ा जमा है। हालात बद से बदतर हो रहे हैं। छंगामल मौर्य, पार्षद, नवादा शेखान,
पीर बहोड़ा में हरी भरी के दो ठेले कूड़ा उठाने आते हैं जबकि वार्ड में 15 हजार से ज्यादा मकानों से कूड़ा उठना हैं। कई कालोनियां निजी खर्च पर कूड़ा उठवा रही हैं। डोर टू डोर का तो कोई मतलब नहीं रह गया है। अजय सक्सेना, पार्षद पीर बहोड़ा
हरी भरी फर्म को पूरे शहर से डोर टू डोर कूड़ा उठाने का दायित्व सौंपा गया है। अभी नई फर्म है। हो सकता हो कि किसी वार्ड में कर्मचारी नहीं पहुंचे हों। फर्म पर और सख्ती की जाएगी। शहर को साफ सुथरा बनाने का लक्ष्य है। इसमें जल्द सुधार नजर आएगा। आरके श्रीवास्तव, नगर आयुक्त