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फजीलत की रात है शब-ए-कद्र

Mon, 27 Jun 2016 12:57 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली
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शब-ए-कद्र बड़ी फजीलत वाली रात है। कुरान करीम में इस एक रात की इबादत को हजार महीनों की इबादत से बढ़ कर बताया गया है। रमजान शरीफ के आखिरी दिनों में 21, 23, 25, 27 व 29वीं रातों में से वह एक रात होती है। लिहाजा शबे कद्र की फजीलत हासिल करने के लिए काफी मुसलमान इन सारी रातों में पूरी रात इबादत करते हैं। जो सोमवार से शुरू हो रहीं हैं। 
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हुजूर नबी-ए-करीम ने फरमाया है कि शब-ए-कद्र को रमजान के आखिरी दिनों की ताक रातों में तलाश करो। उलमा का इस पर इत्तेफाक है कि शब-ए-कद्र रमजान की 27वीं रात है। इस रात में इबादत का सवाब हजार महीनों की इबादत से ज्यादा है। शब-ए-कद्र में कुरान मजीद लौहे महफूज के आसमान से दुनिया में नाजिल हुआ। शब-ए-कद्र के तीस हजार दिन और तीस हजार रातों से अफजल इस रात में इबादत के मुख्तलिफ (अनेक) तरीकें हैं। 
1- दो रकत नमाज ब-नियत नफिल पढ़ें। हर रकत में सूरे अलहमदो.. के बद सूरे इन्ना अनजलना.. और सौ बार सूरे इख्लास.. पढ़ें फिर दुआ मांगे। 
2- चार रकत नफिल पढ़ें। सूरे अलहमदो.. के बाद हर रकत में तीन बार सूरे इन्ना.. और सात बार सूरे इख्लास.. पढ़ें। इसकी बरकत से अल्लाह मौत आसान कर देगा और कब्र का अजाब दूर करेगा। 
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3- दो रकत नफिल पढ़ें। हर रकत में अलहमदो.. के बाद सात बार सूरे इन्न.. और सात बार सूरे इख्लास पढ़ें। नमाज मुकम्मल करके इसतखफार और दरूद शरीफ पढ़ें। इसकी बरकत से पढ़ने वाले को और उसके मां-बाप को खुदा बख्श देगा। 
4- सुबह सादिक के करीब चार रकत नमाज नफिल एक सलाम से पढ़ें। हर रकत में अलहमदो.. के बाद तीन बार सूरे इन्ना.. और पांच बार सूरे इख्लास पढ़ें। नमाज मुकम्मल होने के बाद सजदा करें और सजदे में 41 बार सुब्हान अल्लाह कहें। हर जायज हाजत (जरूरत) पूरी होगी और दुआ कुबूल होगी। 
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                                                               - मौलाना शहाबउद्दीन रजवी, दरगाह आला हजरत।  
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