बरेली। शहर के 15 में से सात नालों को अभी तक टैप कर उनका रामगंगा नदी में गिरना बंद नहीं कराया जा सका है। इन नालों से करीब 62 एमएलडी डिस्चार्ज अभी नदी में गिरता है, जबकि इस गंदे पानी को एसटीपी में भेजा जाना चाहिए। डीएम ने इन सभी नालों को अब टैप करने के लिए कहा है। साथ ही, शहर के 10 किमी के दायरे में मौजूद सभी ईंट भट्ठों की चिमनी का निर्माण जिगजैग तरीके से कराना अनिवार्य होगा।
बृहस्पतिवार को डीएम रविंद्र कुमार की अध्यक्षता में विकास भवन में जिला पर्यावरण समिति, जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा समिति की बैठक हुई। इसमें डीएम ने बताया कि जल निगम के अधीक्षण अभियंता अगली बैठक में नालों को टैप करने का प्रस्ताव रखें। नगर स्वास्थ्य अधिकारी को कूड़ा जलाने के प्रति आगाह किया गया। मीरगंज के ठिरिया गांव में छह हेक्टेयर में फैले वेटलैंड को इको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित कराने के लिए सर्वे कराने के लिए एडीएम वित्त को निर्देशित किया गया। वन विभाग को अब तक हुए पौधारोपण का सत्यापन 15 दिन में कराने के निर्देश दिए। मीरगंज के ग्राम रेतीपुरा में भाखड़ा नदी के घाट के सौंदर्यीकरण के लिए मनरेगा में बजट का इंतजार करने के लिए कहा गया है। जिला गंगा समिति की बैठक में यह तय किया गया कि ऋषिकेश से प्रशिक्षण प्राप्त कर आए हुए पुजारियों द्वारा हर महीने रामगंगा की आरती कराई जाए।
दोनों केंद्र में इतना अंतर क्यों?
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि शहर में दो निगरानी केंद्र काम कर रहे हैं। इसमें राजेन्द्र नगर का एक्यूआई 180 और सदर का 70 है। इस पर डीएम ने नगर निगम और यूपीपीसीबी को यह पड़ताल करने के लिए कहा कि दोनों केंद्रों की रीडिंग में इतना अंतर क्यों है? अमर उजाला ब्यूरो